अंतररास्ट्रीय

अबू धाबी में रूस-यूक्रेन शांति वार्ता

अबू धाबी 

रूस और यूक्रेन के बीच लगभग चार साल से जारी युद्ध के समाप्ति प्रयासों में एक अहम дипломатिक क़दम आज उठाया गया है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पहली बार सीधी वार्ता में शामिल हुए, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका भी मध्यस्थ के रूप में मौजूद था। यह बैठक संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी शहर में हुई, और इसमें तीनों पक्षों ने युद्ध को रोकने, समझौते पर पहुँचने और भविष्य के राजनीतिक ढाँचे पर बातचीत की — लेकिन अभी तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुँचा गया है।

 त्रिपक्षीय बातचीत क्यों?

यूक्रेन पर रूस का पूर्ण-स्केल आक्रमण फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, और तब से यह संघर्ष लगातार जारी है। अबू धाबी की बैठक पहले अवसरों में से एक है जहाँ यूक्रेन, रूस और यूएस की शीर्ष कूटनीतिक व सैन्य टीमें सीधे आमने-सामने संवाद कर रही हैं। यूएस की भागीदारी इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह यूक्रेन का प्रमुख समर्थक और रूस के साथ नीतिगत टकराव में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

रूस की तरफ़ से इस वार्ता में सैन्य खुफिया अधिकारियों के साथ प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जबकि यूक्रेन की टीम में उसके राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और सेनाध्यक्ष शामिल हैं। अमेरिकी टीम में भी उच्च पदस्थ अधिकारी उपस्थित हैं, यह दर्शाता है कि यह वार्ता सिर्फ़ मीडिया प्रचार नहीं बल्कि वास्तविक समझौते के लिए कोशिश है।

सबसे बड़ा मुद्दा — क्षेत्रीय विवाद

वार्ता के सबसे कठिन और प्रमुख मुद्दे का नाम है “डोनबास क्षेत्र का भविष्य”, विशेष रूप से डोनेट्स्क प्रांत। रूस मांग कर रहा है कि यूक्रेन पूरा डोनबास — जिसमें लगभग 20% भाग है जो अभी भी यूक्रेन के नियंत्रण में है — उसे सौंप दे, ताकि युद्ध समाप्त होने के शर्तें पूरी हो सकें।

यूक्रेन इस मांग को स्वीकार नहीं कर रहा है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और उनकी टीम का कहना है कि डोनबास उनके देश की अखण्डता का हिस्सा है और इसे छोड़ देना राष्ट्रीय सुरक्षा तथा भविष्य की रक्षा के लिहाज़ से अस्वीकार्य है। यूक्रेन की तरफ़ से यह भी प्रस्ताव आया है कि डोनबास को एक डिमिलिट्राइज़्ड (निर्मिलिटरी) आर्थिक ज़ोन बनाया जाए जो दोनों पक्षों की सुरक्षा शर्तों को ध्यान में रखते हुए चल सके।

इस मुद्दे पर सहमति न होना ही अब तक वार्ता के परिणाम को बाधित कर रहा है। हर पक्ष की सोच अलग है: रूस चाहता है कि यह क्षेत्र उसकी पूरी तरह नियंत्रण में आए, जबकि यूक्रेन इसे अपने नियंत्रण में रखना चाहता है, बशर्ते कि उसे मजबूत पश्चिमी सुरक्षा गारंटियाँ प्राप्त हों।

 

 

अबू धाबी  : युद्ध की पृष्ठभूमि और मानवीय स्थिति

यह युद्ध सिर्फ कूटनीतिक मुद्दा नहीं है — इसके पीछे भारी राजनैतिक, आर्थिक और मानवीय प्रभाव हैं। रूस का दावा है कि उसने डोनबास को “ऐतिहासिक सुरक्षा हित” के कारण हासिल करना चाहता है, जबकि कई देश और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय इसे वैध नहीं मानते।

यूक्रेन में ऊर्जा प्रणाली, नागरिक ढांचा और बुनियादी सुविधाएँ युद्ध के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई शहरों में बिजली कटौती और घातक तापमान की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका का रोल और समर्थन

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान यूएस ने इस वार्ता में सक्रिय भूमिका निभाई है। यूएस के विशेष प्रतिनिधि रूस-यूक्रेन विवाद को सुलझाने के लिये लगातार प्रयास कर रहे हैं, और अमेरिकी सुरक्षा गारंटियों की पेशकश को दोनों पक्षों सम्मुख रखा गया है।

ट्रंप की टीम और यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के बीच भी पिछले दिनों विश्व आर्थिक मंच दावोस में बातचीत हुई थी, जहाँ पर अगले कदमों और शांति प्रस्तावों पर विचार साझा किया गया। यूएस का इरादा है दोनों पक्षों को बातचीत के ज़रिये समाधान पर लाना, लेकिन इससे पहले भी कई बार असफल प्रयास हो चुके हैं।

अब आगे क्या?

अबू धाबी वार्ता दो दिन तक चलने वाली है, और इसे शनिवार तक जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इस वार्ता से भी तुरंत युद्ध समाप्त होने की संभावना कम है। अभी भी क्षेत्रीय मुद्दे, सुरक्षा गारंटियाँ और राजनीतिक शर्तें टिकी हुई हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस बार वार्ता सफल होती है, तो यह 2022 के बाद सबसे बड़ा कूटनीतिक प्रगति होगा। लेकिन अगर नतीजा नहीं निकलता है तो युद्ध लंबे समय तक जारी रह सकता है — जिससे पहले से ही पीड़ित जनता को और ज़्यादा मुश्किलें झेलनी पड़ सकती हैं।

  • आज की वार्ता ऐतिहासिक अवसर है पर इससे निर्णायक शांति समझौता अभी नहीं बन पाया।
  • डोनबास और डोनेट्स्क पर विवाद सबसे बड़ा ठोस मुद्दा है।
  • अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका में है लेकिन परिणाम अनिश्चित है।
  • युद्ध अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, बातचीत जारी है।

Admin@newsupdating

Recent Posts

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ कटौती से मजबूत होंगे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध

भारत-अमेरिका  भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में फाइनल हुई ट्रेड डील को दोनों…

22 hours ago

आज का गोल्ड-सिल्वर मार्केट अपडेट: गिरावट के बाद लौटी चमक, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

 गोल्ड-सिल्वर  आज के दिन सोना और चांदी के बाजार में एक बार फिर हलचल देखने…

22 hours ago

‘The Kerala Story 2’: टीज़र ने बढ़ाया उत्साह, 27 फरवरी 2026 को होगी रिलीज़

‘The Kerala Story 2’ बॉलीवुड में जब भी किसी विवादित लेकिन प्रभावशाली फिल्म का सीक्वल…

22 hours ago

NDA संसदीय दल की बैठक: संसद सत्र से पहले राजनीतिक संदेश

NDA संसदीय दल नई दिल्ली में आयोजित NDA (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) संसदीय दल की बैठक…

22 hours ago

उत्तर भारत में मौसम का बदलता मिज़ाज : कोहरा, बारिश और बर्फबारी का असर

उत्तर भारत  उत्तर भारत में इन दिनों मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली…

2 days ago

SpaceX का Starlink सैटेलाइट लॉन्च: वैश्विक इंटरनेट की दिशा में एक बड़ा कदम

SpaceX  एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी SpaceX ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष विज्ञान…

2 days ago