ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 25 मई से सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा, जिसके साथ ही नौतपा की शुरुआत होगी। इस अवधि में तापमान में तेज वृद्धि होती है। नौतपा के दौरान अगर बारिश न हो, तो इसे अच्छे मानसून के शुभ संकेत माना जाता है। वहीं, अगर नौतपा के दौरान बारिश आ जाए, तो इसे नौतपा का खंडित होना माना जाता है और यह मानसून के लिए अशुभ संकेत माना जाता है।
इस दौरान लोगों को अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है और उन्हें खुद को धूप से बचाने के लिए विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। नौतपा की यह अवधि अत्यधिक गर्म हवाओं और उच्च तापमान के लिए जानी जाती है। इसके प्रभाव से खेतों में फसलों पर भी असर पड़ता है, जिससे किसान भी चिंतित रहते हैं। यदि नौतपा के दौरान मौसम शुष्क रहता है, तो यह संकेत देता है कि आने वाला मानसून समय पर और प्रचुर मात्रा में बारिश लेकर आएगा। इसीलिए, ज्योतिष और कृषि के जानकार इस समय का विशेष ध्यान रखते हैं और इसके आधार पर आगे की तैयारी करते हैं।
डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, नौतपा के भौगोलिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर नजर डालें तो इस दौरान पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी कम हो जाती है, जिससे सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं। इस कारण इस अवधि में तापमान और सूर्य की तपिश सबसे अधिक होती है। अत्यधिक गर्मी के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। यह निम्न दबाव का क्षेत्र समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है, जिससे ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती हैं। समुद्र को उच्च दबाव वाला क्षेत्र माना जाता है, इसलिए हवाओं के इस रुख से अच्छी बारिश का अनुमान लगाया जाता है।