अमेरिका-वेनेजुएला
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा और विवादित विषय अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव है। 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया है और उन्हें विदेश ले जाया गया है। यह घटना वैश्विक राजनीति, कानून और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद गंभीर मानी जा रही है।
क्या हुआ?
घटना की शुरुआत 3 जनवरी तड़के हुई, जब काराकास और आसपास के इलाकों में तेज़ धमाके और विमान उड़ते हुए देखे गए। अमेरिकी नेतृत्व वाली कार्रवाई के तहत भारी सैन्य बलों का इस्तेमाल किया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में कहा कि यह एक “सफल ऑपरेशन” था, जिसमें मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया गया।
ट्रंप के बयान के अनुसार, मादुरो को न्यायिक प्रक्रिया के लिए अमेरिका ले जाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने सीधे तौर पर वेनेजुएला की संप्रभुता को चुनौती दी है।
पृष्ठभूमि और कारण
इस तनाव की जड़ें लंबे समय से चली आ रही हैं। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर तेल, न्याय, मानवाधिकार और ड्रग संघर्ष जैसे मुद्दों को लेकर। ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला को बार-बार ड्रग तस्करी, भ्रष्टाचार और लोकतंत्र विरोधी गतिविधियों का दोषी ठहराया है। अमेरिका ने कुछ मार्शल और नारको-गैंग्स को आतंकवादी संगठन घोषित किया, जिनके साथ मादुरो के गठबंधन का दावा किया गया।
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े ज्ञात तेल भंडारों वाला देश है और इससे तेल बाजार पर असर और ऊर्जा सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दे जुड़े हैं। इतनी बड़ी ऊर्जा संपदा होने के कारण भी अमेरिका की रुचि चर्चा का विषय रही है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस वाकये पर आगंतुक बैठक बुलाई गई है क्योंकि कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहा है। लैटिन अमेरिकी देशों जैसे स्पेन, ब्राज़ील, चिली, कोलम्बिया, मेक्सिको और उरुग्वे ने अमेरिका की कार्रवाई को “अत्यंत खतरनाक उदाहरण” बताया है, जो शांति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बुरा संकेत है।
उन देशों ने ज़ोर देकर कहा है कि किसी भी विवाद का समाधान केवल संवाद और शांतिपूर्ण माध्यमों से होना चाहिए, न कि सैन्य हस्तक्षेप से।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने भी इस कदम पर “गहरी चिंता” व्यक्त की है और कहा है कि सभी पक्षों को शांति और बातचीत से समाधान ढूँढना चाहिए, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
अमेरिकी घरेलू प्रतिक्रिया
अमेरिका के भीतर भी विवाद है। कुछ लोकतांत्रिक नेताओं ने ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई को अवैध और अनुचित बताया है, यह कहते हुए कि यह अमेरिका की सुरक्षा को मजबूत नहीं बल्कि ख़तरे में डाल सकती है।
वेनेजुएला में शासन की स्थिति
मादुरो के जाने के बाद डेल्सी रोड्रिगेज को अस्थायी राष्ट्रपति घोषित किया गया है। हालांकि उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई की कड़ाई से निंदा की और मादुरो को ही असली राष्ट्रपति बताया। ऐसा प्रतीत होता है कि वे दोनों पक्षों के बीच सत्ता को लेकर विवाद जारी है।
क्या यह युद्ध की शुरुआत है?
विशेषज्ञों के बीच बहस है कि क्या यह कार्रवाई आतंकवाद/ड्रग विरोधी अभियान का हिस्सा है या यह बड़ी रणनीतिक नीति का संकेत है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह कार्रवाई मध्य पूर्व या अन्य देशों पर प्रभाव डाल सकती है, जिससे वैश्विक तनाव और बढ़ सकता है।
तेल, बाजार और आर्थिक प्रभाव
वेनेजुएला के तेल पर इस तनाव के प्रभाव का भी विश्व बाजार पर असर पड़ेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी लेकिन जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है और विदेशी निवेश के फैसले प्रभावित हो सकते हैं।
अमेरिका-वेनेजुएला के बीच यह तनाव सिर्फ दो देशों के बीच सीमा विवाद नहीं है; यह वैश्विक राजनीति, आर्थिक हित, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून की दिशा को प्रभावित कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस पर हैं कि क्या दोनों पक्ष संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटेंगे या संघर्ष और बढ़ेगा।
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