दिल्ली में साथ, लेकिन पंजाब में कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने पर सवाल उठाने पर अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि जहां-जहां बीजेपी का मजबूत आधार है, वहां हमने गठबंधन किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में बीजेपी का प्रभाव नगण्य है, इसलिए हमने कांग्रेस से गठबंधन नहीं किया है। केजरीवाल ने कहा, “हरियाणा, गुजरात, दिल्ली, असम में हमने सीट शेयरिंग की है ताकि बीजेपी के खिलाफ एकजुटता बनी रहे और वोट न बंटें।” उन्होंने आगे बताया कि बीजेपी जहां-जहां प्रभावशाली है, वहां हमने एक ही उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है ताकि विपक्ष के वोटों में विभाजन न हो। लेकिन पंजाब में, जहां बीजेपी का कोई खास अस्तित्व नहीं है, हम अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। केजरीवाल ने यह भी जोड़ा कि यह रणनीति बीजेपी को हराने के हमारे उद्देश्य को मजबूत करती है और हर राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार गठबंधन और चुनावी रणनीति निर्धारित की जाती है। पंजाब में कांग्रेस को चुनौती देने और राज्य में बेहतर शासन लाने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं।
पंजाब में AAP-कांग्रेस अलग-अलग लड़ रहे चुनाव
गौरतलब है कि पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। कई सीटों पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। इन दोनों राजनीतिक दलों की ओर से अपने 12 विधायकों को चुनाव मैदान में उतारा गया है, जिसमें आम आदमी पार्टी के 9 और कांग्रेस के 3 विधायक शामिल हैं। आम आदमी पार्टी के इन 9 विधायकों में से 5 कैबिनेट मंत्री भी हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव में पंजाब की 13 सीटों में से कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी ने 2-2 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि आम आदमी पार्टी ने एक सीट पर कब्जा किया था। इस बार भी चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों पार्टियां अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सीधी टक्कर से यह साफ है कि इस बार का चुनावी परिदृश्य काफी रोमांचक होने वाला है।
पंजाब के कई इलाकों में इन दोनों दलों के उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। इस बार के चुनाव में कौन बाजी मारेगा, यह देखने वाली बात होगी। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी, दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के प्रचार में पूरी ऊर्जा लगा दी है। दोनों दलों की रणनीतियों और प्रचार अभियानों से चुनावी माहौल गर्माया हुआ है।
इस बार के चुनाव परिणाम पंजाब की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी दे सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के चयन में नई रणनीति अपनाई है, जबकि कांग्रेस ने अपने पुराने दिग्गजों पर भरोसा जताया है। दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों की कड़ी टक्कर और जनसमर्थन के आधार पर चुनावी परिणाम का अनुमान लगाया जा रहा है।
बारात तैयार कर दी, लेकिन दुल्हा कौन?
जब अरविंद केजरीवाल से पूछा गया कि आपने बारात तो तैयार कर दी (इंडिया गठबंधन) लेकिन दुल्हा (पीएम पद का चेहरा) कौन होगा, तो उन्होंने चुटीले अंदाज में जवाब दिया। केजरीवाल ने कहा, “उनका (बीजेपी का) दुल्हा कौन है?” हिंदी खबर के एक इंटरव्यू के दौरान केजरीवाल ने कहा, “पीएम मोदी तो जा रहे हैं, उसके बाद अमित शाह आएंगे या योगी आएंगे? वो अपना दुल्हा (पीएम पद का उम्मीदवार) बता दें, तो हम भी अपना दुल्हा बता देंगे।”
केजरीवाल ने यह भी कहा कि बीजेपी की तरफ से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि अगले चुनाव में उनका नेतृत्व कौन करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया गठबंधन में शामिल सभी दल मिलकर देश के भविष्य के बारे में सोच रहे हैं और सही समय पर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का निर्णय लिया जाएगा।
केजरीवाल ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों और कार्यशैली से देश की जनता नाखुश है और बदलाव चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पिछले कुछ सालों में सिर्फ अपने फायदे के लिए काम किया है और आम जनता की समस्याओं की अनदेखी की है।
आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने विश्वास जताया कि इंडिया गठबंधन जनता के हितों को ध्यान में रखकर काम करेगा और देश को सही दिशा में ले जाएगा। उन्होंने कहा कि गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता और सभी दलों का एक साथ मिलकर काम करना है।
आगे के चुनावी रणनीतियों पर बात करते हुए केजरीवाल ने कहा कि जनता का समर्थन और विश्वास ही सबसे बड़ा बल है और वे उसी के आधार पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले चुनावों में इंडिया गठबंधन को जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा और वे मिलकर देश के विकास और प्रगति के लिए काम करेंगे।