उत्तर भारत इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। जनवरी की शुरुआत के साथ ही ठंड ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया जा रहा है। शीतलहर और कोहरे के कारण आम जनजीवन, यातायात और स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।
घना कोहरा बना सबसे बड़ी परेशानी
सुबह और देर रात के समय घना कोहरा छाया रहने से दृश्यता बेहद कम हो गई है। कई इलाकों में विज़िबिलिटी 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। इसका सीधा असर सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों में सैकड़ों ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि कई फ्लाइट्स को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा है। हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
परिवहन सेवाएं प्रभावित
कोहरे के कारण भारतीय रेलवे को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ-साथ लोकल और पैसेंजर ट्रेनें भी देरी से चल रही हैं। हवाई अड्डों पर भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। दिल्ली, लखनऊ, अमृतसर और जयपुर जैसे शहरों में फ्लाइट संचालन प्रभावित हुआ है। यात्रियों को घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों में नाराज़गी देखी जा रही है।
स्कूलों और दफ्तरों पर असर
कड़ाके की ठंड को देखते हुए कई राज्यों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। कुछ जगहों पर प्राथमिक कक्षाओं के लिए छुट्टियां घोषित की गई हैं, जबकि कई स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस शुरू की गई हैं। दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को भी ठंड और कोहरे के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
लगातार बढ़ती ठंड का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ नजर आ रहा है। सर्दी, खांसी, बुखार, सांस की समस्या और जोड़ों के दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड में शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, इसलिए गर्म कपड़े पहनना और संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है।
मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर भारत के कई राज्यों में शीतलहर और घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं और तेज़ हो सकती हैं।
आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित
ठंड के चलते लोग सुबह और देर रात घर से निकलने से बच रहे हैं। बाजारों में भीड़ कम देखी जा रही है, जबकि गर्म कपड़ों, हीटर और अलाव की मांग बढ़ गई है। फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के लिए यह मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है। कई जगह सामाजिक संगठनों और प्रशासन द्वारा अलाव और कंबल वितरण की व्यवस्था की जा रही है।
आगे क्या?
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जनवरी के मध्य तक ठंड का असर बना रह सकता है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है।
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा इस समय एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में सावधानी, सतर्कता और मौसम विभाग की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। सरकार और प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि इस सर्द मौसम से सुरक्षित तरीके से निपटा जा सके।
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