यह विशेष है कि अब ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका का उपयोग नहीं हो रहा है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया में भी इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने कुछ महीनों के बाद इस वैक्सीन के जोखिम को सामने लाया था। इसके बाद, 40 साल से कम उम्र के लोगों को दूसरी वैक्सीन का डोज सुझाया गया था, क्योंकि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन से होने वाले नुकसान कोरोना संक्रमण के खतरे से अधिक थे।
मेडिसिन हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी (MHRA) के अनुसार, ब्रिटेन में 81 मामलों में शक है कि वैक्सीन के कारण खून के थक्के जम सकते हैं, जिससे मौत हो गई हो। MHRA के अनुसार, हर 5 में से एक व्यक्ति की मौत हो गई है जो साइड इफेक्ट्स से जूझ रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में ब्रिटेन में सरकार ने 163 लोगों को मुआवजा दिया था, जिनमें से 158 एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाने वाले थे।
एस्ट्राजेनेका ने 60 लाख लोगों की जानें बचाई
कंपनी ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने अप्रैल 2021 में ही प्रोडक्ट इन्फॉर्मेशन में कुछ मामलों में TTS के खतरे की बात शामिल की थी। कई स्टडीज में यह साबित हुआ है कि कोरोना महामारी के दौरान एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन आने के बाद पहले साल में ही इससे करीब 60 लाख लोगों की जान बची है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने भी कहा था कि 18 साल या उससे ज्यादा की उम्र वाले लोगों के लिए यह वैक्सीन सुरक्षित और असरदार है। इसकी लॉन्चिंग के वक्त ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसे ब्रिटिश साइंस के लिए एक बड़ी जीत बताया था।
वैक्सीन के उपयोग से लाभान्वित हुए लोगों की संख्या को बड़ावा देने के लिए, इसका अध्ययन और अनुसंधान भी विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है।