मुरलीकांत ने 1972 में हुए पैरालंपिक में न केवल फ्रीस्टाइल तैराकी में, बल्कि भाला फेंक, सटीक भाला फेंक और स्लैलम में भी हिस्सा लिया था। इन तीनों ही खेलों में वे फाइनल तक पहुंचे थे। मुरलीकांत को 1968 में इज़राइल के तेल अवीव में हुए पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था, जिसमें वे टेबल टेनिस में दूसरे स्थान पर रहे थे। बाद में, उन्हें 50 साल की उम्र में पुणे में TELCO में नौकरी मिली थी।
ट्रेलर देखकर दर्शकों में जगा उत्साह
‘चंदू चैंपियन’ की बात करें तो फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज किया गया है। इसमें कार्तिक ने मुरलीकांत के किरदार में दर्शकों का दिल जीत लिया है। अभिनेता के बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन और अभिनय की खूब तारीफ हो रही है। ट्रेलर देखने के बाद दर्शक फिल्म की रिलीज के लिए और भी ज्यादा उत्साहित हो गए हैं। फिल्म में भुवन अरोड़ा और पलक लालवानी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। साजिद नाडियाडवाला द्वारा निर्मित यह फिल्म 14 जून को रिलीज होगी।
पद्मश्री से सम्मानित हैं मुरलीकांत
बता दें, जर्मनी के हीडलबर्ग में 1972 के पैरालंपिक में मुरलीकांत पेटकर ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में 37.33 सेकंड का समय निकालकर इतिहास रच दिया था। यह उपलब्धि उन्हें पैरालंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने वाली पहली भारतीय तैराक बना गई। मुरलीकांत का यह रिकॉर्ड कई वर्षों तक अटूट रहा और उन्होंने भारतीय खेल जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
मुरलीकांत पेटकर को भारतीय खेलों में उनके योगदान के लिए साल 2018 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें न केवल उनकी खेल उपलब्धियों के लिए, बल्कि उनके अदम्य साहस और प्रेरणादायक जीवन के लिए भी दिया गया। युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी और तैराकी में विश्वस्तरीय प्रदर्शन कर दिखाया। मुरलीकांत का जीवन और संघर्ष आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ भी उनके संघर्ष और जीत की कहानी को बड़े पर्दे पर दिखाने के लिए तैयार है।