लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की शुरुआती अवस्था में रोगियों में आमतौर पर फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में यह आंतरिक रक्तस्राव और अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रारंभिक लक्षणों में तेज बुखार, आंखों में संक्रमण या लालिमा, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, दस्त और पीलिया शामिल हो सकते हैं। जबकि गंभीर स्थिति में खांसी के साथ खून आना (हेमोप्टाइसिस), छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और पेशाब में खून आने जैसे आंतरिक रक्तस्राव के लक्षण प्रकट हो सकते हैं।
किडनी और लिवर फेलियर का भी खतरा
लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण कुछ मामलों में अत्यधिक गंभीर और जानलेवा हो सकता है। यदि समय पर उचित इलाज न मिले या संक्रमण बहुत बढ़ जाए, तो मरीजों को सांस लेने में कठिनाई और मेनिन्जाइटिस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मेनिन्जाइटिस में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा करने वाली झिल्लियों में सूजन हो जाती है, जो काफी खतरनाक स्थिति मानी जाती है।
इसके अलावा, संक्रमण के गंभीर मामलों में किडनी और लिवर फेलियर का जोखिम भी बढ़ जाता है, जो प्रायः घातक साबित हो सकता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण नजर आते ही मरीज तुरंत चिकित्सा सलाह लें, ताकि संक्रमण को गंभीर होने से रोका जा सके और जीवन को खतरे से बचाया जा सके।
संक्रमण से कैसे करें बचाव?
लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, इसलिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सभी को संक्रामक रोगों से बचाव के लिए लगातार सावधानी बरतनी चाहिए।
संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि आप दूषित पानी के संपर्क से दूर रहें और जानवरों के सीधे संपर्क से बचें। पीने के लिए हमेशा साफ पानी का इस्तेमाल करें या पानी को उबालकर ठंडा करके पिएं। अगर आपके शरीर पर कहीं चोट या घाव है, तो उसकी उचित देखभाल और सफाई जरूर करें ताकि संक्रमण से बचा जा सके।