पंजाब

पंजाब: कांग्रेस की पहली सूची में चौधरी परिवार पर चन्नी की भारी प्रभावितता, बठिंडा में प्रदेश प्रधान को भी उपेक्षा।

कांग्रेस ने अमृतसर से गुरजीत सिंह औजला को चुनावी मैदान में उतारा है। जालंधर एससी सीट से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को उम्मीदवार घोषित किया गया है। फतेहगढ़ साहिब से अमर सिंह, बठिंडा से जीत मोहिंदर सिंह सिद्धू, संगरूर से सुखपाल सिंह खैरा व पटियाला से डॉक्टर धर्मवीर गांधी को उम्मीदवार बनाया गया है।

पंजाब की 13 लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस ने लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची में पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी को उम्मीदवार घोषित किया है, जिससे दलित वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई गई है। कांग्रेस ने छह उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसमें से दो सांसदों, गुरजीत औजला और डॉ. अमर सिंह, को दोबारा टिकट दिया गया है। वहीं, बठिंडा में अकाली दल को पूरी तरह से घेरने के लिए अकाली दल के पूर्व नेता जीत मोहिंदर सिद्धू को टिकट दिया गया है।

अमृतसर में पूर्व डिप्टी ओपी सोनी पर दो बार सांसद रहे गुरजीत औजला भारी पड़े हैं। उन पर तीसरी बार कांग्रेस ने दांव खेला है। बठिंडा से पूर्व विधायक जीत महिंदर सिद्धू को उम्मीदवार बनाया गया है। यहां से पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अपनी पत्नी अमृता वड़िंग के लिए पैरवी कर रहे थे। तलवंडी साबो से अकाली दल के पूर्व विधायक सिद्धू पुराने कांग्रेसी हैं। वह 2014 में अकाली दल में शामिल हो गए थे। उस वक्त वह कांग्रेस विधायक थे, और इसके कारण अगस्त 2014 में उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी, जिसे उन्होंने शिअद के टिकट पर जीता।

सिद्धू 2002, 2007 और 2012 में तलवंडी साबो से तीन बार कांग्रेस विधायक रहे। 2017 और 2022 में उन्होंने अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन आप की बलजिंदर कौर से हार गए। इसके बाद 2023 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने जीत मोहिंदर सिद्धू के जरिए बठिंडा में अकाली दल का किला ध्वस्त करने की योजना तैयार की है, जहां से बीबी हरसिमरत कौर सांसद हैं। इसके साथ ही, कांग्रेस ने बठिंडा में अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए चरणजीत सिंह चन्नी को उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने पिछले कुछ सालों में पंजाब की राजनीतिक सीने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी को जालंधर से टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने यहां से सांसद संतोख चौधरी परिवार को टिकट देने का निर्णय लिया है। संसदीय चौधरी ने हाल ही में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में निधन किया था। इसके बाद, उनकी पत्नी, कर्मजीत चौधरी ने उपचुनाव में उम्मीदवारी की, लेकिन वह हार गईं। इस बार, चौधरी परिवार उनकी टिकट के खिलाफ था। कांग्रेस ने इसे देखते हुए चन्नी पर भरोसा दिखाया है और उन्हें दलित वोटरों को आकर्षित करने का उपाय समझा है।

पंजाब कांग्रेस उमीदवार

टकसालियों को साथ लेकर चलना औजला के लिए चुनौती

कांग्रेस ने अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला को तीसरी बार लोकसभा के लिए टिकट देकर अपना विश्वास प्रकट किया है। इस बार भी औजला के लिए अमृतसर सीट का जीतना हाईकमान की झोली में डालना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि कांग्रेस के टकसाली नेता ओम प्रकाश सोनी के टिकट की मांग भी थी। टकसालियों का कहना था कि औजला का काम निचले स्तर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कोई संबंध नहीं है। अगर कांग्रेस सिख चेहरों को अधिकतम स्थान देना चाहती है, तो अमृतसर से इंद्रबीर सिंह बुलारिया को टिकट देना उचित होगा। लेकिन अब कांग्रेस ने टकसालियों की मांग को नजरअंदाज करते हुए तीसरी बार गुरजीत सिंह औजला को अमृतसर से टिकट दिया है। अब औजला के लिए टकसालियों के साथ साथ चलना मुश्किल हो सकता है। 2017 के लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने गुरजीत सिंह औजला को मैदान में उतारा था। औजला अमृतसर लोकसभा सीट के इतिहास में सबसे अधिक वोट लेकर विजयी हुए थे। 2019 में भी उन्होंने 4,45,032 वोटों के साथ फिर से विजय हासिल की थी।

 

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