सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार को भी कठोर फटकार लगाई। जजों ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2020 में मामला उत्तराखंड सरकार को भेजा था, लेकिन उत्तराखंड के अधिकारियों ने इस मामले में निष्क्रियता दिखाई। अब उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तराखंड की दवा लाइसेंसिंग अथॉरिटी के जॉइंट डायरेक्टर को भी कठोर फटकार लगाई। कोर्ट में मौजूद अधिकारी से कोर्ट ने कहा कि आपने अब तक इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं करवाया। यह क्यों न माना जाए कि आपकी इनसे मिलीभगत है। मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर 9 महीने से पद पर हैं। कोर्ट ने उनसे पहले पद पर रहे अधिकारी को भी हलफनामा दाखिल करने और अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने को कहा है। साथ ही 2018 से अब तक हरिद्वार के जिला आयुष अधिकारी रहे लोगों को भी हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। इस पहलू पर 23 अप्रैल को सुनवाई होगी|
वकील ने माफीनामा स्वीकार करने की अपील की
रामदेव और बालकृष्ण के वकीलों ने जजों के सामने दलील देते हुए कहा कि उन्होंने माफी मांगी है और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। अब जब अधिकारियों से पूछताछ हो रही है, तो निश्चित रूप से उनकी तरफ से कुछ कार्रवाई होगी। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पूछा कि क्या माफीनामा लिखी बातों के लिए वकीलों को सलाह दी गई थी, और क्या उसमें कुछ कमी रह गई है। रामदेव और बालकृष्ण के वकीलों ने भी इस पर सवाल उठाया। इस पर जज ने कहा कि हम आपकी सलाह में कमी नहीं बता रहे हैं, लेकिन हम पूरे मामले को उसके तथ्यों के आधार पर देख रहे हैं।