भारत-नेपाल सीमा एक बार फिर चर्चा में है। हाल के दिनों में सीमापार अवैध गतिविधियों, घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत में प्रवेश की घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने सीमा पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
भारत-नेपाल की सीमा लगभग 1,750 किलोमीटर लंबी है और कई हिस्सों में यह खुली सीमा (Open Border) मानी जाती है। इसी वजह से आम नागरिकों की आवाजाही आसान रहती है, लेकिन इसका फायदा असामाजिक तत्व भी उठाने की कोशिश करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हाल के महीनों में कुछ संगठित गिरोह सीमा का इस्तेमाल तस्करी और अवैध घुसपैठ के लिए कर रहे हैं।
हाई सिक्योरिटी ज़ोन घोषित
गृह मंत्रालय ने बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से सटे नेपाल बॉर्डर के कई हिस्सों को हाई सिक्योरिटी ज़ोन घोषित किया है। इन इलाकों में 24 घंटे पेट्रोलिंग, अतिरिक्त नाकेबंदी और सघन जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल (SSB) के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी मिलकर निगरानी कर रही हैं।
सीमा चौकियों पर अब पहले से ज्यादा सख्ती बरती जा रही है। संदिग्ध लोगों की पहचान, दस्तावेजों की जांच और वाहनों की तलाशी नियमित रूप से की जा रही है। सुरक्षा बलों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट किया जाए।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा का इस्तेमाल ड्रग्स, नकली करेंसी, हथियार और मानव तस्करी के लिए भी किया जाता रहा है। इसके अलावा कुछ मामलों में फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से भारत में प्रवेश की कोशिशें भी सामने आई हैं।
इन्हीं कारणों से सीमा पर इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया गया है। ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी, नाइट विज़न डिवाइस और आधुनिक संचार साधनों की मदद से निगरानी बढ़ाई गई है। सुरक्षा बलों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि किसी भी खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
अतिरिक्त जवानों की तैनाती
हाई अलर्ट के बाद सीमा पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। कई इलाकों में अस्थायी चेक पोस्ट बनाए गए हैं ताकि सीमावर्ती गांवों से आने-जाने वाले रास्तों पर नजर रखी जा सके। स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने और आम लोगों से सहयोग लेने के निर्देश दिए गए हैं।
सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। इससे सुरक्षा एजेंसियों को जमीनी स्तर पर मदद मिल रही है।
भारत-नेपाल संबंधों पर असर नहीं
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह हाई अलर्ट भारत-नेपाल के मित्रवत संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा। दोनों देशों के बीच पहले से ही सुरक्षा सहयोग और समन्वय की व्यवस्था है। नेपाल प्रशासन के साथ भी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है ताकि सीमा पर शांति बनी रहे।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, निगरानी कड़ी : भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध बेहद मजबूत हैं। लाखों लोग रोज़गार, शिक्षा और व्यापार के लिए सीमा पार करते हैं। इसलिए सरकार का उद्देश्य आम नागरिकों को परेशान करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भारत-नेपाल सीमा पर घोषित हाई अलर्ट यह दर्शाता है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं। घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उठाए गए ये कदम देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम हैं। आने वाले दिनों में निगरानी और सख्त होने की संभावना है, जिससे सीमा क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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