नई दिल्ली: कांग्रेस में इन दिनों कुछ भी चीज ठीक नहीं चल रहा है। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने की चर्चा के बीच कांग्रेस के एक अन्य नेता मनीष तिवारी के भी भगवा दल में शामिल होने की अटकलें हैं। यूपीए सरकार में बीजेपी पर सबसे ज्यादा हमलावर रहने वाले तिवारी अपनी पार्टी से खुश नहीं हैं। आनंदपुर साहिब से कांग्रेस के सांसद तिवारी और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बीच संसद में बहस का एक वीडियो चर्चा में हैं। इस वीडियो में सुषमा तिवारी को सुना रही हैं।
17 अगस्त 2011 के इस वीडियो में सुषमा उस समय के पहली बार के सांसद तिवारी के किसी बयान को लेकर उन्हें खूब सुना रही हैं। एक्स पर वायरल हो रहे इस वीडियो में सुषमा कह रही हैं मैंने नाम लेकर कहा है कि कांग्रेस के प्रवक्ता इसी सदन के सदस्य हैं। सुषमा कह रही हैं कि बल्कि मैं तो उन्हें सलाह देना चाहती हूं मनीष तिवारी को कि आपका राजनैतिक जीवन अभी शुरू हुआ है, पहली बार सांसद बनकर आए हो, थोड़ा भाषा का संयम सीखो। ये शेर मैंने आपके लिए ही पढ़ा है कि दुश्मनी जमकर करो ‘दुश्मनी जमकर करो पर इतनी गुंजाइश रहे कि फिर कभी हम दोस्त बन जाएं तो शर्मिंदा ना हों’।
हालांकि, तिवारी ने बीजेपी में शामिल होने की खबरों का खंडन किया है। उनके ऑफिस ने इन अटकलों को अफवाह करार दिया है। उनके ऑफिस ने एक्स पर पोस्ट करके लिखा कि ये अफवाहें आधारहीन और निराधार हैं। गौरतलब है कि तिवारी यूपीए सरकार के दौरान केंद्र में मंत्री रहे थे। वो बीजेपी पर तीखे हमल करते हैं।
खबरों के मुताबिक तिवारी इसबार लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी वह आनंदपुर साहिब से कांग्रेस के सांसद हैं। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी में उनके शामिल होने को लेकर एक पेच फंसा है। पार्टी के सूत्रों ने बताया कि लुधियाना से बीजेपी के पास एक मजबूत कैंडिडेट है। यही वजह है कि तिवारी का मामला फंसा हुआ है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता तिवारी वरिष्ठ वकील भी हैं। 2012-14 तक वह यूपीए सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रहे थे। वो 2009-2014 तक पंजाब के लुधियान से सांसद रहे हैं। वो कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता भी हैं। तिवारी 1988 -1993 तक भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे। इसके अलावा तिवारी 1998 से लेकर 2000 तक भारतीय युवा कांग्रेस (NSUI) के अध्यक्ष रहे थे। 2004 को लोकसभा चुनाव में तिवारी को हार का सामना करना पड़ा था। फिर उन्होंने 2009 में लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2014 में तिवारी ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर आम चुनाव नहीं लड़ा था।
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