सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था और सीधे सीएम की कुर्सी पर बैठ गए। उस समय किसी को भी पहली बार उनके नाम पर भरोसा नहीं था और जब आज मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, तो भी किसी को यकीन नहीं हुआ। वे जाते समय भी लोगों को हैरान कर गए।
उनकी चर्चाएं सीएम पद से हटने की लगभग डेढ़ साल पहले हुई थीं, लेकिन प्रधानमंत्री व अमित शाह ने उनके कामों की प्रशंसा की, जिससे लगता था कि मनोहर लाल को तीसरी बार भी सरकार का चेहरा बनाए रखा जाएगा। उनके सामने कई चुनौतियां आई, जैसे किसान आंदोलन, पहलवानों का धरना प्रदर्शन, जाट आंदोलन और राम रहीम की गिरफ्तारी, लेकिन उनकी कुर्सी पर खतरा कभी बना नहीं।
उनके कुशल प्रशासक और प्रबंधन के कारण उन्हें पीएम मोदी और शाह के चहेते बनाए गए। उन्होंने कुशल अधिकारियों की अच्छी फौज भी तैयार की थी, जिससे उन्हें काम में कोई दिक्कत नहीं आई।
मनोहर लाल को इन योजनाओं के लिए स्मरणशील किया जाएगा
मनोहर लाल ने अपने दोनों कार्यकाल के दौरान कई ऐसी योजनाएं लायीं, जिनसे उन्हें पूरे देश में चर्चा में रहने का मौका मिला। उनके कठिन फैसलों के बाद भी, उन्हें लोगों की बहस का सामना करना पड़ा। कुछ योजनाओं में, केंद्र सरकार भी उनके अनुयायी रहे। पूर्व सीएम मनोहर लाल ने सरपंच चुनाव में भाग लेने के लिए आठवीं और दसवीं कक्षा पास होने की शर्त लगा दी थी।
इस फैसले पर काफी आलोचना हुई, लेकिन एक बार मनोहर लाल ने अमित शाह से संवाद किया, जिसमें शाह ने कहा कि अगर उन्हें उनकी जगह होती तो वह शायद इतना कठिन फैसला नहीं लेते। इसके बाद, उन्होंने स्वामित्व योजना का आयोजन किया, जिसके अंतर्गत गांव के लोगों को मालिकाना अधिकार प्राप्त हुआ।
उनकी इस योजना ने इतनी प्रसिद्धि प्राप्त की कि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार की इसे अपना लिया। हरियाणा में हर परिवार को आईडी बनाने के लिए वह परिवार पहचान पत्र की योजना लाई। इसके प्रारंभ में, इसके खिलाफ काफी विरोध हुआ, लेकिन बाद में लोग इसे स्वीकारने लगे।
उनकी इस योजना के प्रसार के कारण कई राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई थी। इसके अलावा, पेड़ों को पेंशन देने की योजना या राज्य के कुंवारों को। उनके इस निर्णय को पूरे देश ने सराहा। वहीं, लोगों को घर बैठे काम कराने के लिए उन्होंने कई पोर्टल लाए। विपक्ष ने इसे विरोध किया, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़े रहे।
मनोहर लाल केंद्र में जा सकते हैं