राजनीति

मनोहर लाल: चौंकानेवाले विचारों से आए थे, जाने के समय भी हैरान हो गए; ये हैं सीएम मनोहर लाल के बदलाव के चार कारण।

मनोहर लाल

हरियाणा राजनीति समाचार: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, भाजपा ने हरियाणा में एक चौंकानेवाला कदम उठाया है। मंगलवार को मनोहर लाल और उनके मंत्रिमंडल ने इस्तीफा दे दिया। साथ ही, भाजपा ने जजपा से संबंध तोड़ लिया है। नायब सिंह सैनी को हरियाणा के नए मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। आइए जानते हैं, मनोहर लाल के बदलाव के चार कारण।

मंगलवार को हरियाणा में मनोहर लाल की सत्ता समाप्त हो गई। उन्होंने साढ़े नौ साल तक हरियाणा में शासन किया। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, जब उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए उठाया गया, तो सभी हैरान थे। यह पहली बार था जब उन्होंने विधायक के पद की कमी पूरी की|

सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था और सीधे सीएम की कुर्सी पर बैठ गए। उस समय किसी को भी पहली बार उनके नाम पर भरोसा नहीं था और जब आज मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, तो भी किसी को यकीन नहीं हुआ। वे जाते समय भी लोगों को हैरान कर गए।

उनकी चर्चाएं सीएम पद से हटने की लगभग डेढ़ साल पहले हुई थीं, लेकिन प्रधानमंत्री व अमित शाह ने उनके कामों की प्रशंसा की, जिससे लगता था कि मनोहर लाल को तीसरी बार भी सरकार का चेहरा बनाए रखा जाएगा। उनके सामने कई चुनौतियां आई, जैसे किसान आंदोलन, पहलवानों का धरना प्रदर्शन, जाट आंदोलन और राम रहीम की गिरफ्तारी, लेकिन उनकी कुर्सी पर खतरा कभी बना नहीं।

उनके कुशल प्रशासक और प्रबंधन के कारण उन्हें पीएम मोदी और शाह के चहेते बनाए गए। उन्होंने कुशल अधिकारियों की अच्छी फौज भी तैयार की थी, जिससे उन्हें काम में कोई दिक्कत नहीं आई।

मनोहर लाल को इन योजनाओं के लिए स्मरणशील किया जाएगा

मनोहर लाल ने अपने दोनों कार्यकाल के दौरान कई ऐसी योजनाएं लायीं, जिनसे उन्हें पूरे देश में चर्चा में रहने का मौका मिला। उनके कठिन फैसलों के बाद भी, उन्हें लोगों की बहस का सामना करना पड़ा। कुछ योजनाओं में, केंद्र सरकार भी उनके अनुयायी रहे। पूर्व सीएम मनोहर लाल ने सरपंच चुनाव में भाग लेने के लिए आठवीं और दसवीं कक्षा पास होने की शर्त लगा दी थी।

इस फैसले पर काफी आलोचना हुई, लेकिन एक बार मनोहर लाल ने अमित शाह से संवाद किया, जिसमें शाह ने कहा कि अगर उन्हें उनकी जगह होती तो वह शायद इतना कठिन फैसला नहीं लेते। इसके बाद, उन्होंने स्वामित्व योजना का आयोजन किया, जिसके अंतर्गत गांव के लोगों को मालिकाना अधिकार प्राप्त हुआ।

उनकी इस योजना ने इतनी प्रसिद्धि प्राप्त की कि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार की इसे अपना लिया। हरियाणा में हर परिवार को आईडी बनाने के लिए वह परिवार पहचान पत्र की योजना लाई। इसके प्रारंभ में, इसके खिलाफ काफी विरोध हुआ, लेकिन बाद में लोग इसे स्वीकारने लगे।

उनकी इस योजना के प्रसार के कारण कई राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई थी। इसके अलावा, पेड़ों को पेंशन देने की योजना या राज्य के कुंवारों को। उनके इस निर्णय को पूरे देश ने सराहा। वहीं, लोगों को घर बैठे काम कराने के लिए उन्होंने कई पोर्टल लाए। विपक्ष ने इसे विरोध किया, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़े रहे।

मनोहर लाल केंद्र में जा सकते हैं

मनोहर लाल केंद्रीय नेतृत्व के खासमखास हैं। मोदी ही उन्हें सीएम के तौर पर लाए थे। इस प्रकार, मनोहर लाल को केंद्र में नई भूमिका मिल सकती है। उन पर वर्तमान में दो चर्चाएं चल रही हैं। पहली, वह करनाल से सांसद के चुनाव लड़ सकते हैं। यदि वे चुनाव जीतते हैं, तो वे केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। दूसरी, उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। संघ से जुड़े होने के कारण, उनका नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उच्च स्तर पर चल रहा है। तथापि, एक सवाल के जवाब में उन्होंने इसके लिए इंकार किया था।

नायब सिंह सैनी को पिछले साल अक्तूबर में हरियाणा भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में, विधानसभा चुनाव के नजदीक होने से पहले ही सरकार में कई परिवर्तन किए गए। हालांकि, नायब सिंह सैनी मनोहर लाल के संग सम्बंधित नेताओं में शामिल हैं। दोनों ने संगठन में मिलकर काम किया है। मनोहर लाल के नेतृत्व में, केंद्रीय नेतृत्व ने सैनी को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था।

पिछले दिन प्रधानमंत्री ने मनोहर की थी तारीफ

प्रधानमंत्री मोदी ने मनोहर लाल के इस्तीफे से एक दिन पहले मनोहर लाल की विशेष तारीफ की थी। 11 मार्च को गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के मौके पर, पीएम ने अपनी पुरानी यादों का जिक्र करते हुए कहा था कि उनकी और मनोहर लाल की दोस्ती बहुत पुरानी है। वह याद करते हुए बताए थे कि मनोहर लाल के पास एक मोटरसाइकिल थी, जिसे मनोहर सवारी करते थे और वह उनके पीछे बैठते थे।

चीफ मिनिस्टर की पद पर परिवर्तन के चार कारण

  1. सरकार के साढ़े नौ साल के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर उठी थी, जिसको काटने के लिए नेतृत्व में परिवर्तन किया गया।
  2. राज्य में अफसरशाही छाई हुई थी। मंत्रियों की नाराजगी थी, लेकिन मनोहर लाल की प्रयासों में सम्मान नहीं मिला।
  3. पिछड़े वर्ग के साधने के लिए मनोहर लाल की जगह पर सैनी को चुना गया।
  4. राज्य को नया नेतृत्व देने की इच्छा थी, जैसे कि एमपी और राजस्थान ने किया था, इसलिए मनोहर को हटाया गया।

हरियाणा के नए मुख्यमंत्री के रूप में नायब सिंह सैनी नियुक्त हुए

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, भाजपा ने हरियाणा में एक चौंकाने वाला निर्णय लिया है। जननायक जनता पार्टी (जजपा) से गठबंधन तोड़कर, मनोहर लाल की जगह नए मुख्यमंत्री के रूप में नायब सिंह सैनी को चुना गया है। नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद की शपथ हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कुरुक्षेत्र से सांसद और ओबीसी समुदाय के चेहरे के रूप में मंगलवार शाम को दिलाई गई। इस साथ, पांच मंत्रियों कंवरपाल गुर्जर, मूलचंद शर्मा, रणजीत सिंह चौटाला, जेपी दलाल और डॉ. बनवारी लाल ने भी अपनी शपथ ली। यहां तक ​​कि ये पांचों मंत्री पहले से मनोहर लाल की सरकार में भी थे। फिलहाल, कोई नया चेहरा जोड़ा नहीं गया है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल और 13 मंत्रियों ने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर इस्तीफा दे दिया। इसके बाद, दिल्ली से आए पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, तरुण चुघ, और प्रभारी बिप्लब कुमार देब की मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक में नायब सिंह सैनी को विधायक दल का नेता चुना गया। सैनी के नाम का प्रस्ताव मनोहर लाल ने ही रखा था। नायब सिंह सैनी ने राजभवन पहुंचकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

इसके साथ ही, पिछले कई दिनों से जजपा के साथ गठबंधन आगे बढ़ाने की खबरों पर भी विराम लग गया। पार्टी ने जजपा के साथ चार साल से चल रहे गठबंधन को भी तोड़ा। कांग्रेस ने इसे नाटक माना है और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने और दोबारा चुनाव करवाने की मांग की है।

 

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