जांच एजेंसी द्वारा रिमांड लिए जाने के बाद जब आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है, उसके बाद ही आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई होती है। अर्थात, रिमांड के दौरान जमानत पर सुनवाई नहीं होती है, बल्कि न्यायिक हिरासत की अवधि के दौरान जमानत पर सुनवाई होती है।
डिफॉल्ट बेल कब मिलती है?
यदि निश्चित समय सीमा में चार्जशीट नहीं दाखिल की जाती, तो आरोपी को जमानत दी जाती है। अर्थात, सीआरपीसी की धारा-167 (2) के तहत 10 साल तक की सजा के मामले में गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी आवश्यक है और इस समय के दौरान अगर चार्जशीट नहीं दाखिल की जाती है, तो आरोपी को जमानत मिलती है। जबकि 10 साल से अधिक या फांसी की सजा के मामले में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करने पर भी आरोपी को जमानत मिल जाती है। कानूनी जानकार और वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता बताते हैं कि चाहे मामला कितना भी गंभीर हो, अगर पुलिस समय पर चार्जशीट नहीं दाखिल करे, तो भी आरोपी को जमानत दी जा सकती है। उदाहरण के रूप में, 10 साल या उससे अधिक सजा के मामले में गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना आवश्यक होता है। अगर इस दौरान चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है, तो आरोपी को जमानत दी जाती है।
अग्रिम जमानत कब दी जाती है?