इसके अलावा, सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी खरगे ने मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने रूढ़िवादी शब्द आज जरूरत से ज्यादा बोले। इसे कहते हैं, रस्सी जल गई, बल नहीं गया। देश को आशा थी कि मोदी जी महत्वपूर्ण मुद्दों पर कुछ बोलेंगे।”
खरगे ने आगे कहा, “नीट और अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के बारे में युवाओं के प्रति कुछ सहानुभूति दिखाने की अपेक्षा थी, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की धांधली और भ्रष्टाचार के बारे में कोई जिम्मेदारी नहीं ली। हाल ही में हुई पश्चिम बंगाल की रेल दुर्घटना पर भी मोदी जी मौन साधे रहे। मणिपुर पिछले 13 महीनों से हिंसा की चपेट में है, पर मोदी जी न तो वहां गए और न ही उन्होंने आज के अपने भाषण में ताज़ा हिंसा के बारे में कोई चिंता व्यक्त की है।”
खरगे ने यह भी कहा, “प्रधानमंत्री को देश के युवाओं, किसानों और मजदूरों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। सरकार को अपनी विफलताओं को स्वीकार करके उनकी समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। सिर्फ पुराने मुद्दों को उठाकर और भाषणबाजी से देश का भला नहीं हो सकता। देश को आज सही नेतृत्व और संवेदनशील सरकार की जरूरत है, जो जनता की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सके।”
इन मुद्दों पर क्यों हैं चुप?
खरगे ने आगे कहा, “असम और पूर्वोत्तर में बाढ़ हो, कमरतोड़ महंगाई हो, रुपया का गिरना हो, एग्जिट पोल-स्टॉक मार्केट घोटाला हो, या फिर अगली जनगणना का लंबित रहना हो; मोदी सरकार ने इन सभी मुद्दों पर चुप्पी साध रखी है। जातिगत जनगणना पर भी मोदी जी ने कोई बात नहीं की। आप 50 साल पुराने आपातकाल की याद दिला रहे हैं, लेकिन पिछले 10 साल के अघोषित आपातकाल को भूल गए, जिसका जनता ने अंत कर दिया।”
उन्होंने कहा, “लोगों ने मोदी जी के खिलाफ जनमत दिया है। इसके बावजूद अगर वे प्रधानमंत्री बने हुए हैं, तो उन्हें काम करना चाहिए। जनता को नारे नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान चाहिए। विपक्ष और इंडिया जनबंधन संसद में बहस चाहता है। हम जनता की आवाज सदन, सड़क और हर मंच पर उठाते रहेंगे। हम संविधान की रक्षा करेंगे। लोकतंत्र ज़िंदाबाद!”