सोना-चाँदी
आज घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चाँदी की कीमतों में हलचल देखने को मिली। कभी तेजी तो कभी हल्की गिरावट के बीच निवेशक और आम खरीदार दोनों ही असमंजस की स्थिति में नजर आए। वैश्विक आर्थिक संकेतों, डॉलर की मजबूती-कमजोरी, ब्याज दरों की आशंका और भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर कीमती धातुओं के भाव पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चाँदी की कीमतें मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करती हैं। हाल के दिनों में अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यदि ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशक सोने से दूरी बनाते हैं, जिससे कीमतों में दबाव आता है। वहीं, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी या राजनीतिक तनाव की खबरें आती हैं, तो सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है और इसकी मांग बढ़ जाती है।
आज भी कुछ ऐसा ही रुख देखने को मिला, जहां वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव रहा।
🇮🇳 भारतीय बाजार की स्थिति
भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने के भाव में हल्की तेजी देखी गई, जबकि चाँदी के दामों में उतार-चढ़ाव बना रहा। शादी-विवाह के सीजन और आने वाले त्योहारों के कारण सोने की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। हालांकि ऊँचे दाम होने की वजह से आम ग्राहकों की खरीदारी अभी सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में फसल की स्थिति और किसानों की आय भी सोने की मांग को प्रभावित करती है। जैसे-जैसे बाजार में नकदी बढ़ती है, वैसे-वैसे सोने और चाँदी की खरीद में इजाफा होता है।
सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का सीधा असर ज्वेलरी सेक्टर पर पड़ रहा है। कई शहरों में ज्वेलर्स का कहना है कि ग्राहक अभी “देखो और इंतजार करो” की नीति अपना रहे हैं। लोग कीमतों के स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि बेहतर सौदे में खरीदारी की जा सके।
चाँदी के आभूषण और बर्तनों की मांग हालांकि औद्योगिक और घरेलू दोनों स्तर पर बनी हुई है, लेकिन दाम बढ़ने पर इसमें भी थोड़ी सुस्ती देखी जाती है।
औद्योगिक मांग और चाँदी
चाँदी केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल उपकरणों में भी होता है। यही कारण है कि जब औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आती है, तो चाँदी की मांग बढ़ जाती है। हाल के समय में ग्रीन एनर्जी और सोलर सेक्टर में निवेश बढ़ने से चाँदी को लेकर दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
निवेश विशेषज्ञों के अनुसार, सोना और चाँदी दोनों ही लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं। हालांकि अल्पकालिक निवेश करने वालों को कीमतों के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: एक ही समय में बड़ी रकम निवेश करने से बचें चरणबद्ध तरीके से निवेश करें पोर्टफोलियो में सोना-चाँदी का संतुलित हिस्सा रखें
आने वाले दिनों का अनुमान
आने वाले दिनों में सोने और चाँदी की कीमतें मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करेंगी:
वैश्विक आर्थिक आंकड़े
अमेरिका और अन्य देशों की मौद्रिक नीति
डॉलर की चाल
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हालात
यदि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने को समर्थन मिल सकता है। वहीं, औद्योगिक मांग बढ़ने पर चाँदी में भी मजबूती देखने को मिल सकती है।
कुल मिलाकर, आज का दिन सोना और चाँदी दोनों के लिए मिश्रित रुख वाला रहा। जहां निवेशक सतर्क नजर आए, वहीं आम खरीदार कीमतों के स्थिर होने का इंतजार करता दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के नजरिए से सोना और चाँदी अब भी भरोसेमंद विकल्प हैं, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी है।
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