पिछले पंद्रह दिनों में सोने की कीमतें अत्यधिक उच्चाईयों को छू चुकी हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक मंदी, हमास और इजराइल के बीच युद्ध, और बढ़ती बेरोजगारी के भय ने अमेरिकी सरकार को फेडरल फंड दर में कटौती करने पर मजबूर किया, और बड़े निवेशकों ने सोने की ओर मोड़ लिया।
भारतीय बुलियन ट्रेड कारपोरेशन के निदेशक और अर्थशास्त्री आशुतोष अग्रवाल ने बताया कि चुनाव की सरगर्मी ने भी सोने और चांदी की दरों को बढ़ा दिया है। यह स्थिति भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव को बढ़ा देती है और निवेशकों की चेतावनी है। अग्रवाल ने इसे विशेषज्ञों की दृष्टि से दिया।
यूनाइटेड ज्वेलर्स और मैन्यूफैक्चरर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि सोने की कीमत 65 हजार के ऊपर पहुंचकर 65,100 हजार रुपये हो गई है। जून से पहले सोने की कीमत का आंकड़ा 68 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है, जो बाजार में व्यापारिक गतिविधियों के आधार पर अनुमानित किया जा रहा है। अग्रवाल ने इस बढ़ती कीमत को विशेषज्ञों की दृष्टि से व्याख्यात किया है।
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