केंद्र ने कहा था कि उम्मीदवारों के पास दोबारा परीक्षा देने या ग्रेस मार्क्स को छोड़ने का विकल्प होगा। यह परीक्षा 5 मई को 4,750 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 24 लाख उम्मीदवारों ने भाग लिया था। परिणाम 14 जून को घोषित होने थे, लेकिन समय से पहले जांच के चलते इसे 4 जून को घोषित कर दिया गया, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर 10 जून को दिल्ली सहित कई शहरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। सात उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में मामले दायर किए गए।
रिजल्ट पर बवाल की वजह
- NTA के इतिहास में अभूतपूर्व रूप से 67 छात्रों ने पूरे 720 अंक प्राप्त किए
- इसमें हरियाणा के फरीदाबाद के एक केंद्र के छह छात्र भी शामिल थे
- इसके बाद अनियमितताओं का संदेह होना शुरू हुआ
- आरोप है कि ग्रेस मार्क्स के कारण 67 छात्रों को शीर्ष रैंक मिली है।
क्या है NEET-UG?
NEET-UG परीक्षा, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाती है, जिसका उद्देश्य देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में MBBS, BDS, आयुष और अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करना है। यह परीक्षा चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले लाखों छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
परीक्षा का आयोजन सख्त नियमों और प्रक्रियाओं के तहत किया जाता है ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। NEET-UG परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवारों को उनकी रैंक और अंकों के आधार पर विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है। इसके अतिरिक्त, यह परीक्षा न केवल छात्रों की शैक्षिक योग्यता का परीक्षण करती है बल्कि उनके समर्पण और तैयारी के स्तर को भी जांचती है।
हाल के वर्षों में, NEET-UG परीक्षा के परिणामों में अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं के आरोप सामने आए हैं, जिसके चलते कई छात्रों ने न्यायिक हस्तक्षेप और पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। इन मुद्दों को सुलझाने के लिए विभिन्न न्यायालयों में याचिकाएं दायर की गई हैं और केंद्र सरकार और NTA द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी संदेहों और समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए।