August 3, 2026

मेरठ हनीट्रैप गैंग का खुलासा: लड़की बनकर चैट, फर्जी पुलिस बनकर करते थे ब्लैकमे

मेरठ में सामने आया हैरान करने वाला हनीट्रैप रैकेट

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक ऐसे हनीट्रैप गैंग का खुलासा किया है, जिसने सोशल मीडिया के जरिए कई लोगों को अपना शिकार बनाया। आरोप है कि गिरोह के सदस्य पहले इंस्टाग्राम पर लड़की बनकर युवकों से दोस्ती करते थे, फिर उन्हें मिलने के लिए सुनसान जगह पर बुलाते थे। वहां पहुंचने के बाद खुद को पुलिस अधिकारी या पत्रकार बताकर उन्हें डराया-धमकाया जाता और लाखों रुपये की रंगदारी मांगी जाती। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

मेरठ

मेरठ ऐसे चलता था पूरा हनीट्रैप का खेल

पुलिस जांच के अनुसार गैंग बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता था। सबसे पहले आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाते थे। इसके बाद वे युवकों से लगातार बातचीत कर विश्वास जीतते थे। कई दिनों तक चैटिंग के बाद मुलाकात का प्रस्ताव दिया जाता था।

जैसे ही पीड़ित तय स्थान पर पहुंचता, वहां महिला की जगह गिरोह के अन्य सदस्य मौजूद मिलते। इसके बाद वे खुद को पुलिसकर्मी, वरिष्ठ अधिकारी या पत्रकार बताकर युवक को अवैध संबंध, अश्लीलता या अन्य फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देते थे। डर के माहौल में पीड़ित से मौके पर ही पैसे ऐंठे जाते थे।

फर्जी पुलिस चौकी बनाकर करते थे वसूली

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने लोगों को भरोसे में लेने के लिए फर्जी पुलिस जैसी व्यवस्था भी तैयार कर रखी थी। वहां पुलिस की वर्दी, नेम प्लेट और अन्य सामान मौजूद था ताकि पीड़ित को लगे कि वह वास्तव में पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहा है। इसी डर का फायदा उठाकर गैंग मोटी रकम वसूलता था।

मेरठ शिकायत के बाद खुला राज

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती एक लड़की से हुई थी। कुछ समय बाद मिलने के लिए बुलाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही कुछ लोगों ने उसे घेर लिया। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी और पत्रकार बताते हुए उसके खिलाफ मामला दर्ज कराने की धमकी दी और दो लाख रुपये की मांग की। दबाव बनाकर उससे ऑनलाइन 10 हजार रुपये भी ट्रांसफर करवा लिए गए। बाद में पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

वीडियो बनाकर करते थे ब्लैकमेल

पुलिस के अनुसार आरोपी केवल मौके पर पैसे लेकर नहीं रुकते थे। वे पीड़ित के फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड कर लेते थे। बाद में इन्हीं तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल कर लगातार ब्लैकमेल किया जाता था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस गिरोह ने अन्य जिलों में भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।

मेरठ दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश

मेरठ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राहुल पाल और आकाश नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह में कुल पांच सदस्य शामिल होने की आशंका है और बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितने लोग इस गैंग का शिकार बन चुके हैं।

पुलिस की लोगों से अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से दोस्ती करते समय सावधानी बरतें। किसी भी अज्ञात प्रोफाइल पर भरोसा न करें और बिना पूरी जानकारी के किसी सुनसान स्थान पर मिलने न जाएं। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताकर पैसे मांगता है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

साइबर अपराध से बचने के आसान उपा

  • सोशल मीडिया पर केवल सत्यापित लोगों से ही बातचीत करें।
  • अनजान प्रोफाइल पर निजी जानकारी साझा न करें।
  • किसी भी दबाव में ऑनलाइन भुगतान न करें।
  • ब्लैकमेल होने पर डरने की बजाय तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।
  • संदिग्ध प्रोफाइल और चैट का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

मेरठ का यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों को मानसिक रूप से फंसाने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के नए तरीके अपना रहे हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन जांच अभी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सतर्कता और समय पर शिकायत ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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