अरविंद केजरीवाल के सबसे क़रीबी लोगों में से एक माने जाने वाले राघव चड्ढा की इस पूरे मुद्दे से दूरी बनाए जाने को पंजाब यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रोफ़ेसर डॉक्टर आशुतोष कुमार भी सामान्य नहीं मानते।
वह कहते हैं, “राघव चड्ढा की भगवंत मान से कई मुद्दों पर असहमति की ख़बरें आती रही हैं। अगर राघव को उनसे तकलीफ़ है तो भी अरविंद केजरीवाल के साथ हर समय दिखने वाले चड्ढा अब अपने नेता की गिरफ़्तारी के बाद भी कहीं नहीं हैं। ये अजीब बात है।”
राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने की अटकलों को भी वह ग़लत नहीं मानते।
प्रोफ़ेसर आशुतोष कहते हैं, “ऐसा बिल्कुल संभव है। बीजेपी के पास पंजाब में कोई प्रभावशाली नेता नहीं है। राघव चड्ढा युवा हैं, अपनी बातों को वे न सिर्फ़ सही तरह से गढ़ते हैं बल्कि उनकी लोगों के बीच एक अच्छी पहुंच भी है। बीजेपी वैसे भी ऐसे नेताओं की तलाश में है। बीजेपी का फ़ोकस 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव है। उस पर से राघव चड्ढा खत्री समुदाय से आते हैं जो प्रभावशाली माने जाते हैं और शहरी वोटर हैं। बीजेपी का मतदाता भी इसी वर्ग का है। राघव बीजेपी के लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकते हैं।”
राघव चड्ढा सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं
राघव चड्ढा अभी दिल्ली में नहीं हैं, लेकिन बीते गुरुवार रात, जब अरविंद केजरीवाल के घर पर ईडी पहुंची, उस समय से ही राघव चड्ढा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे हैं।
केजरीवाल की गिरफ़्तारी के बाद, राघव चड्ढा ने ट्वीट किया, “भारत में अभी तक घोषित आपातकाल है। अरविंद केजरीवाल दूसरे ऐसे सीएम हैं जिन्हें चुनाव से पहले ही गिरफ़्तार किया गया है। हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं? भारत में एजेंसियों का इतना बेजा इस्तेमाल कभी नहीं देखा गया है।”
राघव चड्ढा ने अगले दिन एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने अरविंद केजरीवाल सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया और कहा, “बहुत दिनों से इस चर्चा में था कि अरविंद केजरीवाल को साजिश के तहत गिरफ़्तार किया जाएगा, और आज वह सत्य हो गया।”
प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार, हालांकि, राघव चड्ढा के सोशल मीडिया पर दिखाई गई सक्रियता को अधिक महत्व नहीं देते हैं।
उन्होंने हाल ही में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने वाले लुधियाना के सांसद रवीन सिंह बिट्टू का उदाहरण दिया और बताया, “रवनीत सिंह बिट्टू भी सोशल मीडिया पर हर दिन कांग्रेस के समर्थन में पोस्ट लिखते थे, लेकिन एक दिन अचानक वह बीजेपी में चले गए। इसलिए सोशल मीडिया पर कोई क्या लिखता है, उसका ज़्यादा महत्व नहीं है।”
राघव चड्ढा की आम आदमी पार्टी में भूमिका
सन् 2013 में जब अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोध आंदोलन अपने अंतिम चरण में था, उस समय राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल से मिला।
पेशेवर चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में राघव चड्ढा लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भारत लौटे।
एक डेली ओ की रिपोर्ट के अनुसार, राघव चड्ढा को पार्टी में पहला कार्य दिल्ली जनलोकपाल बिल के ड्राफ्ट को तैयार करने वाले वकील राहुल मेहरा का सहायक बनाया गया था। इस जिम्मेदारी को उन्हें अरविंद केजरीवाल ने सौंपा था।
राघव चड्ढा ने पार्टी में अधिक युवा प्रवक्ता के रूप में उपाधि हासिल की और कुछ ही समय में उन्हें टेलीविज़न पर आम आदमी पार्टी का चेहरा बना दिया गया।
आम आदमी पार्टी की वेबसाइट के अनुसार, राघव साल 2013 में पार्टी की घोषणापत्र तैयार करने वाली टीम के सदस्य थे। कुछ समय के लिए, उन्हें पार्टी के कोषाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था।
एक दशक पहले, वालंटियर के रूप में अरविंद केजरीवाल की टीम में शामिल होने के बाद, राघव चड्ढा अब उनके सबसे विश्वसनीय रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।
2019 में, राघव चड्ढा ने दक्षिणी दिल्ली से संसदीय चुनाव लड़ा, लेकिन वे असफल रहे। इसके बाद, 2020 में वे दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट से जीत दर्ज की।
मार्च 2022 में, राघव चड्ढा को और चार लोगों को आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा के लिए नामित किया। उस समय, राघव चड्ढा 33 साल के थे और वे सबसे युवा सांसद बने।
माना जाता है कि 2022 में पंजाब में हुई आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत में राघव चड्ढा का महत्वपूर्ण योगदान था। पंजाब की सफलता के बाद, पार्टी ने उन्हें 2022 के अंत में गुजरात विधानसभा चुनाव की भी जिम्मेदारी दी और सह प्रभारी बनाया।