August 21, 2026

चिकन नेक पर अमित शाह की नजर, सिलीगुड़ी दौरा क्यों है खास? जानिए पूरी कहानी

भारत के नक्शे में एक ऐसा बेहद संकरा इलाका है, जिसकी चौड़ाई कई जगहों पर करीब 22 किलोमीटर तक सिमट जाती है। इसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर या आम बोलचाल में चिकन नेक कहा जाता है। यही गलियारा भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ने वाली बेहद अहम कड़ी है। इसी रणनीतिक इलाके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे के कारण सुरक्षा से जुड़ी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चिकन नेक

क्या है ‘चिकन नेक’?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित करीब 60 किलोमीटर लंबा और लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र है। इसकी रणनीतिक अहमियत इसलिए बहुत ज्यादा है क्योंकि पूर्वोत्तर भारत तक सड़क और रेल के जरिए पहुंचने के लिए यह मुख्य भूमि संपर्क का महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके आसपास नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन की सीमाएं मौजूद हैं, जिससे इस इलाके की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

अगर किसी वजह से इस संकरे गलियारे में आवाजाही बाधित होती है तो पूर्वोत्तर और देश के बाकी हिस्सों के बीच संपर्क पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इसे भारत की रणनीतिक ‘जीवनरेखा’ भी कहा जाता है।

अमित शाह के दौरे पर क्यों है नजर?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 21 और 22 अगस्त को सिलीगुड़ी में रहेंगे। उनके दौरे में सीमा सुरक्षा की समीक्षा, सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक और सीमा प्रबंधन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर चर्चा प्रमुख एजेंडे में है। शाह सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों से भी बातचीत करेंगे। SSB भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

22 अगस्त को होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा बलों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल, मौजूदा सुरक्षा तैयारियों और सीमा से जुड़े बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी।

घुसपैठ और सीमा सुरक्षा भी अहम मुद्दा

सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास भारत-बांग्लादेश सीमा भी है। ऐसे में अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और सीमा पार होने वाली गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रही हैं। सरकार इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और सीमा प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

जुलाई में भी अमित शाह ने सिलीगुड़ी के जूमागाछ इलाके में BSF की सीमा चौकी का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने वाली तकनीकों का निरीक्षण किया था। इनमें बाड़ से छेड़छाड़ की पहचान करने वाली प्रणाली और दुर्गम इलाकों के लिए इंफ्रारेड अलार्म सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल थीं।

चीन की मौजूदगी से बढ़ती रणनीतिक अहमियत

चिकन नेक के उत्तर में चीन के तिब्बत क्षेत्र और आसपास नेपाल-भूटान की मौजूदगी इस क्षेत्र को सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर में सड़क, रेल और सैन्य ढांचे का विस्तार भी इस कॉरिडोर की सुरक्षा को और महत्वपूर्ण बनाता है।

भारत के लिए चुनौती सिर्फ सीमा की निगरानी तक सीमित नहीं है। इस पूरे क्षेत्र में सड़क, रेलवे, पुल, संचार नेटवर्क और लॉजिस्टिक सुविधाओं को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। इसलिए सीमा सुरक्षा के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर भी सरकार का जोर है।

क्यों खास है यह 22 किलोमीटर?

‘चिकन नेक’ की सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी दोनों इसकी भौगोलिक स्थिति है। बेहद कम चौड़ाई वाले इस गलियारे से भारत का पूर्वोत्तर बाकी देश से जुड़ा है। इसलिए यहां सुरक्षा में किसी भी तरह की कमजोरी का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रह सकता।

अमित शाह का मौजूदा सिलीगुड़ी दौरा इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में लिए जाने वाले फैसले आने वाले समय में इस रणनीतिक गलियारे की निगरानी, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा तकनीक और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा तय कर सकते हैं।बैठक में लिए जाने वाले फैसले आने वाले समय में इस रणनीतिक गलियारे की निगरानी, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा तकनीक और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा तय कर सकते हैं।

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