चुनाव आयोग ने कहा है कि याचिकाकर्ता नई-नई आशंकाएं जता कर मतदाताओं को भ्रमित करना चाहता है। मतदान का वास्तविक आंकड़ा कई प्रकार के वेरिफिकेशन के बाद आता है और यह पहले भी बदलता रहा है। आयोग ने कहा कि मतदान के दिन ही फॉर्म 17C की कॉपी हर प्रत्याशी के एजेंट को दे दी जाती है। इसे सार्वजनिक रूप से वेबसाइट पर डालना संभव नहीं है क्योंकि उसका दुरुपयोग हो सकता है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने यह याचिका दायर की है। इस याचिका में मांग की गई थी कि लोकसभा चुनाव के प्रत्येक चरण के मतदान समाप्ति के 48 घंटे के भीतर मतदान केंद्र-वार आंकड़े वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं। 17 मई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
चुनाव आयोग ने 225 पेज के हलफनामे में बताया कि याचिकाकर्ता का अनुरोध स्वीकार करना कानूनी रूप से प्रतिकूल होगा और इससे पहले से ही लोकसभा चुनाव में जुटी चुनावी मशीनरी में अराजकता पैदा हो सकती है। आयोग ने बताया कि 2019 के चुनाव में भी मतदान आंकड़ों में 2 से 3 फीसदी का अंतर रहा है, और इसके लिए उन्होंने 2019 का पूरा डेटा जारी किया है। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान के दिन जारी आंकड़ों और बाद में जारी प्रेस विज्ञप्ति में ‘5-6 प्रतिशत’ की वृद्धि के आरोप गलत और भ्रामक हैं।