June 26, 2026

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को मिली नई मजबूती: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का सियोल दौरा

प्रस्तावना

भारत-दक्षिण कोरिया  के बीच संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इसी दिशा में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने दक्षिण कोरिया की राजधानी Seoul का महत्वपूर्ण दौरा किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत-दक्षिण कोरिया : द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा

विदेश मंत्री जयशंकर और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री Cho Hyun के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग की समीक्षा की गई। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के दौर में समान मूल्यों और विश्वास पर आधारित साझेदारियां पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं। दोनों पक्षों ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक और दूरदर्शी साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत-दक्षिण कोरिया

व्यापार और निवेश पर विशेष जोर

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने तथा निवेश के नए अवसरों की तलाश करने पर सहमति जताई। हाल के महीनों में दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को उन्नत बनाने के लिए कई दौर की बातचीत की है। इसका उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के उद्योगों को अधिक अवसर प्रदान करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विशाल बाजार क्षमता और दक्षिण कोरिया की उन्नत विनिर्माण तकनीक एक-दूसरे के लिए पूरक साबित हो सकती हैं। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

भारत-दक्षिण कोरिया : तकनीक और नवाचार में सहयोग

वार्ता के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक और उभरती प्रौद्योगिकियों पर भी चर्चा हुई। दक्षिण कोरिया विश्व स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जबकि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।

दोनों देशों ने तकनीकी अनुसंधान, स्टार्टअप सहयोग और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास में साझेदारी को मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की। इससे दोनों देशों के युवाओं और उद्योगों को नए अवसर मिलने की संभावना है।

रक्षा सहयोग का विस्तार

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, सैन्य तकनीक और संयुक्त परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया है। बैठक में रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा और नई रक्षा तकनीकों पर सहयोग को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

विशेष रूप से संयुक्त उत्पादन और उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास पर दोनों देशों की रुचि दिखाई दी। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।

भारत-दक्षिण कोरिया : स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास

वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, हरित उद्योग और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। ऊर्जा सुरक्षा, हरित हाइड्रोजन और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को भविष्य की साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

भविष्य की संभावनाएं

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते संबंध केवल आर्थिक या रणनीतिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। दोनों देशों का मानना है कि मजबूत जनसंपर्क किसी भी दीर्घकालिक साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत होता है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का दक्षिण कोरिया दौरा भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई गति देने वाला साबित हुआ है। व्यापार, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और वैश्विक मुद्दों पर हुई व्यापक चर्चा से स्पष्ट है कि दोनों देश भविष्य में और अधिक निकट सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए लाभदायक होगी, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, विकास और समृद्धि को भी बढ़ावा देगी।

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