August 16, 2026

राम मंदिर में नया ड्रेस कोड लागू, पीले बिना सिले वस्त्रों में दिखे अर्चक

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में झूलनोत्सव के बीच अर्चकों की वेशभूषा में बदलाव किया गया है। अब मंदिर में पूजा-अर्चना कराने वाले अर्चक पीले रंग के बिना सिले पारंपरिक वस्त्रों में नजर आ रहे हैं। यह बदलाव मंदिर की धार्मिक मर्यादा, अनुशासन और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

15 अगस्त से राम मंदिर में झूलनोत्सव की शुरुआत भी हुई है। इस दौरान रामलला को विशेष रूप से सजाया जा रहा है और भक्तों के बीच उत्सव का माहौल बना हुआ है। इसी अवसर पर अर्चकों की नई वेशभूषा भी चर्चा का विषय बन गई है।

राम मंदिर

अर्चकों के लिए बदली वेशभूषा

राम मंदिर में अर्चकों के लिए पारंपरिक वेशभूषा को प्राथमिकता दी गई है। अब पीले रंग के बिना सिले वस्त्रों को पूजा के दौरान धारण किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अर्चकों की पोशाक में एकरूपता लाना और मंदिर की धार्मिक पहचान को मजबूत करना बताया गया है।

मंदिर में अर्चकों के ड्रेस कोड को पहले भी बदला जा चुका है। दिसंबर 2024 में पीली धोती, चौबंदी और पीली पगड़ी जैसी वेशभूषा लागू की गई थी। उस समय मंदिर की पहचान और धार्मिक अनुशासन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई थी।

राम मंदिर पीले रंग को क्यों दी गई प्राथमिकता?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में पीले रंग को शुभ और पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु के साथ पीले वस्त्रों का विशेष संबंध बताया जाता है और भगवान राम को भी पीतांबर धारण करने वाले स्वरूप में देखा जाता है।

रामलला के वस्त्रों में भी अलग-अलग अवसरों पर पीले रंग का इस्तेमाल किया जाता रहा है। रामनवमी जैसे विशेष पर्वों पर रामलला को पीले वस्त्र धारण कराए जाते हैं।

झूलनोत्सव से जुड़ी खास परंपरा

अयोध्या में सावन के दौरान झूलनोत्सव की विशेष धार्मिक परंपरा रही है। राम मंदिर में भी इस उत्सव को भव्य रूप दिया जा रहा है। इस दौरान रामलला को विशेष झूले पर विराजमान कराया जाता है और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

इस बार मंदिर में झूलनोत्सव की शुरुआत 15 अगस्त से हुई है। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए भी यह उत्सव धार्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

धार्मिक मर्यादा पर जोर

राम मंदिर में अर्चकों की वेशभूषा में बदलाव को केवल कपड़ों का परिवर्तन नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे मंदिर की पूजा पद्धति और धार्मिक मर्यादा को अधिक व्यवस्थित बनाने का उद्देश्य भी जुड़ा है।

मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर पूजा कराने वाले अर्चकों की पोशाक को एक विशेष पहचान से जोड़कर देखा जाता है। एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा से श्रद्धालुओं को भी पूजा व्यवस्था को समझने में आसानी होती है।

राम मंदिर पहले भी लागू हो चुके हैं कई नियम

राम मंदिर में अर्चकों और कर्मचारियों के लिए पहले भी कई नियम लागू किए जा चुके हैं। इनमें मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़े प्रतिबंध और निर्धारित पोशाक जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

2024 में मंदिर ट्रस्ट की ओर से अर्चकों के लिए पीली धोती, चौबंदी और पगड़ी निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पूजा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।

श्रद्धालुओं के लिए बढ़ा आकर्षण

झूलनोत्सव के दौरान रामलला के विशेष श्रृंगार और अर्चकों की पारंपरिक वेशभूषा से मंदिर का धार्मिक वातावरण और भी खास नजर आ रहा है। पीले वस्त्रों में अर्चकों की तस्वीरें और वीडियो भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

मंदिर प्रशासन की ओर से समय-समय पर व्यवस्थाओं को धार्मिक परंपरा और अनुशासन के अनुरूप ढालने की कोशिश की जा रही है। नए ड्रेस कोड को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

परंपरा और अनुशासन का संगम

राम मंदिर में लागू किया गया नया ड्रेस कोड धार्मिक परंपरा और अनुशासन दोनों को सामने रखता है। पीले बिना सिले वस्त्रों के माध्यम से अर्चकों की वेशभूषा को अधिक पारंपरिक स्वरूप दिया गया है।

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