राजनीति

रामविलास वेदांती का निधन: संत समाज और राम जन्मभूमि आंदोलन को गहरा आघात

राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संत, वरिष्ठ धर्मगुरु और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. रामविलास वेदांती का आज निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे देश में, विशेष रूप से अयोध्या, संत समाज और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वे लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

जानकारी के अनुसार, रामविलास वेदांती बीते कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। वे मध्य प्रदेश के रीवा में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे, जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें दिल से जुड़ी गंभीर समस्या हुई थी, जिसके बाद उनका निधन हो गया।

धार्मिक जगत में शोक

रामविलास वेदांती के निधन से संत समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। वे केवल एक संत ही नहीं, बल्कि हिंदू धर्म और संस्कृति के मुखर प्रवक्ता भी थे। अयोध्या में उनका विशेष सम्मान था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते थे। उनके आश्रम में शोक सभा का आयोजन किया गया, जहां साधु-संतों और भक्तों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका

डॉ. रामविलास वेदांती का नाम राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है। उन्होंने इस आंदोलन के दौरान देशभर में जनजागरण किया और राम मंदिर निर्माण के समर्थन में लगातार आवाज उठाई। उनके भाषणों में धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की स्पष्ट झलक देखने को मिलती थी। वे आंदोलन के दौरान कई बार विवादों में भी आए, लेकिन अपने विचारों पर अडिग रहे।

 

 

रामविलास वेदांती : राजनीतिक जीवन

रामविलास वेदांती ने संत जीवन के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे और लोकसभा सांसद भी बने। संसद में रहते हुए उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाया। हालांकि राजनीति में उनकी पहचान हमेशा एक संत नेता के रूप में रही।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

रामविलास वेदांती का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव धर्म और अध्यात्म की ओर था। युवा अवस्था में ही उन्होंने संत जीवन अपना लिया और अयोध्या को अपनी कर्मभूमि बनाया। यहीं से उन्होंने धार्मिक शिक्षा, कथा-वाचन और समाज सेवा का कार्य प्रारंभ किया।

अंतिम संस्कार की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर अयोध्या लाया जाएगा, जहां सरयू तट के पास पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

देशभर से श्रद्धांजलि

उनके निधन पर कई संतों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें एक निडर, स्पष्ट वक्ता और धर्मनिष्ठ संत के रूप में याद किया। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

हमेशा याद रहेंगे

रामविलास वेदांती का जीवन धर्म, संघर्ष और विचारधारा को समर्पित रहा। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक युग का अंत माना जा रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन, संत समाज और उनके अनुयायियों के दिलों में उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।

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