पंजाब में, आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए नए उम्मीदवारों को चुना है। आपने चुनावी पहली सूची में कई विभिन्न सांघनियों को जोड़ा है। पंज मंत्रियों के चुनावी दंगल में शामिल होने से प्रतिस्पर्धा रोचक हो गई है।
पंजाब की आठ लोकसभा सीटों पर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने प्रबल उम्मीदवारों को उतारकर चुनावी प्रतिस्पर्धा को रोचक बना दिया है। पार्टी ने जहां पर अपने पूर्व मंत्रियों पर भरोसा दिखाया है, वहीं कॉमेडियन-अभिनेता कर्मजीत अनमोल जैसे नवाबिक उम्मीदवारों पर भी धावा किया है।
ऐसे ही, कांग्रेस से गुरप्रीत सिंह जीपी को उम्मीदवार बनाकर जातीय समीकरणों को संतुष्ट किया गया है। कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में आने वाले सुशील रिंकू को उपचुनाव में जीत का इनाम दिया गया है, जो कि इस बार फिर से टिकट प्राप्त किया।
दिल्ली की तर्ज पर, आम आदमी पार्टी ने अधिकांश विधायकों को चुनावी रणनीति के तहत मैदान में उतारा। राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक ने सूबे के पांच कैबिनेट मंत्रियों को टिकट देकर कड़ी प्रतिस्पर्धा की योजना की है।
पिछले लोकसभा चुनाव में, आम आदमी पार्टी ने केवल संगरूर सीट से जीत हासिल की थी। उस समय, भगवंत मान ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। लेकिन, 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद, भगवंत मान से उप-मुख्यमंत्री के पद पर अग्रिम भार आया।
उन्होंने लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया और उपचुनाव में, यह सीट शिअद (अमृतसर) के सिमरनजीत सिंह मान ने उनसे जीत ली। पार्टी ने इस बार यहां से मीत हेयर को उतारा है, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में, यूपीए ने 8 और एनडीए ने चार सीटें जीती थीं।
भाजपा और कांग्रेस की रणनीति पर ध्यान दिया गया।
संदीप पाठक के निकटवर्ती सूत्रों के अनुसार, पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की मजबूत संभावना है, और इस दौरान दोनों पार्टियों द्वारा मैदान में प्रमुख चेहरों को उतारने की तैयारी जारी है।
भाजपा अमृतसर से भारतीय राजदूत के रूप में अमेरिका में सेवानिवृत्त तरणजीत सिंधू, और आनंदपुर साहिब से कन्हैया मित्तल को मैदान में उतारने की संभावना है। होशियारपुर से केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश को भी फिर से टिकट देने की संभावना है।
कांग्रेस भी चरणजीत सिंह चन्नी, रवनीत बिट्टू, राजा वड़िंग, और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। इसलिए, उन्हें इन महानायकों के साथ मुकाबला करने के लिए दमदार चेहरों की आवश्यकता है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार दो साल से चल रही है, और अब उनके तीन साल का कार्यकाल शेष है।
संदीप पाठक के निकटवर्ती सूत्रों के अनुसार, पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की मजबूत संभावना है, और इस दौरान दोनों पार्टियों द्वारा मैदान में प्रमुख चेहरों को उतारने की तैयारी जारी है।
भाजपा अमृतसर से भारतीय राजदूत के रूप में अमेरिका में सेवानिवृत्त तरणजीत सिंधू, और आनंदपुर साहिब से कन्हैया मित्तल को मैदान में उतारने की संभावना है। होशियारपुर से केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश को भी फिर से टिकट देने की संभावना है।
कांग्रेस भी चरणजीत सिंह चन्नी, रवनीत बिट्टू, राजा वड़िंग, और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। इसलिए, उन्हें इन महानायकों के साथ मुकाबला करने के लिए दमदार चेहरों की आवश्यकता है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार दो साल से चल रही है, और अब उनके तीन साल का कार्यकाल शेष है।
बठिंडा में यह युद्ध रोचक होगा
बठिंडा लोकसभा सीट पर चुनावी युद्ध अत्यंत रोचक हो चुका है। यहाँ से उम्मीदवार बनाए गए कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां 2022 के विधानसभा चुनाव में लंबी सीट से पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भारी मतों से हराकर चर्चा में आए थे। इस सीट पर कांग्रेस और शिअद के प्रत्याशियों का एलान अभी बाकी है। यहाँ से शिअद हरसिमरत कौर बादल को फिर से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। दूसरी ओर, अगर कांग्रेस ने पंजाब के अध्यक्ष राजा वड़िंग की पत्नी अमृता वड़िंग को चुनाव मैदान में उतार दिया तो शिअद और कांग्रेस के बीच टक्कर होगी। गुरमीत सिंह खुड्डियां के पिता जगदेव सिंह खुड्डियां फरीदकोट सीट से सांसद रह चुके हैं। गुरमीत खुड्डियां लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहे हैं, जबकि 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लंबी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था तो उस समय गुरमीत खुड्डियां ही कैप्टन के कवरिंग थे। वर्ष 2021 में खुड्डियां ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। उनके पिता जगदेव सिंह खुड्डियां सांसद रहने के बाद मंडी बोर्ड के चेयरमैन भी रहे थे|
संगरूर में सीएम मान के साथ युवा मंत्री की परीक्षा हो रही है
संगरूर संसदीय सीट से आम आदमी पार्टी ने कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर को चुनाव मैदान में उतारा है। मान सरकार के युवा मंत्री 35 वर्षीय मीत हेयर के साथ ही भगवंत मान की इस सीट पर परीक्षा होगी। हेयर बरनाला विधानसभा सीट से पिछले दो चुनाव लगातार जीत चुके हैं। पोस्ट ग्रेजुएएट मीत हेयर ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 2017 में बरनाला सीट से लड़ा था। कांग्रेस के दिग्गज प्रत्याशी केवल सिंह ढिल्लों को हराने के बाद वे सुर्खियों में आए थे। 2022 विधानसभा चुनाव में उन्होंने 37622 मतों के बड़े अंतर से लगातार दूसरी जीत दर्ज की थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो लोकसभा चुनाव 2014 व 2019 में भी मीत हेयर ने अहम भूमिका निभाई थी। सीएम मान ने उक्त दोनों संसदीय चुनाव रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीते थे। राजनीतिक गलियारों में उनको भगवंत मान का सारथी तक बताया जाता है। मीत हेयर का सबसे अहम पहलू यह है कि उनकी पकड़ शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में है।
ग्रामीण क्षेत्रों में वोट बैंक के लिए मुकाबला हो रहा है
पटियाला से पंजाब के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री, 67 साल के डॉ. बलबीर सिंह, आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनेंगे। उनकी ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत बातचीत है, इसलिए असली मुकाबला भी ग्रामीण वोट बैंक के लिए ही होगा। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. बलबीर सिंह ने 2020 में दिल्ली के बॉर्डरों पर चल रहे किसानी आंदोलन में मुफ्त में चिकित्सा सेवाएं प्रदान की थीं। उन्होंने जेपी मूवमेंट और अन्ना हजारे आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। बाद में उन्होंने आम आदमी पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा। उनकी पार्टी से वफादारी और लोगों के साथ मजबूत संबंधों के कारण, डॉ. बलबीर सिंह को पटियाला से एक मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है, जिसे हाईकमान ने चुनावी टिकट दिया है। पंजाबी यूनिवर्सिटी के राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़ का मानना है कि आप आने वाले लोकसभा चुनावों में किसी भी प्रकार का रिस्क लेने की सोच में नहीं हैं।
ग्रामीण वोट बैंक पर प्रतिस्पर्धा
पंजाब के वर्तमान सेहत मंत्री, 67 साल के डॉ. बलबीर सिंह अब आम आदमी पार्टी के उपायुक्त लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनेंगे। उनका ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत नेतृत्व है, इसलिए असली मुकाबला भी ग्रामीण वोट बैंक के लिए ही होगा। डॉ. बलबीर सिंह, एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, ने 2020 में दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में चले किसान आंदोलन में मुफ्त में चिकित्सा सेवाएं प्रदान की थीं। उन्होंने जेपी मूवमेंट और अन्ना हजारे आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने बाद में आम आदमी पार्टी से जुड़कर राजनीति में भाग लिया। उनकी पार्टी में वफादारी और डॉक्टर के रूप में लोगों के साथ मजबूत संबंध के कारण, वे पटियाला से एक मजबूत उम्मीदवार के रूप में नामित किए गए हैं। पंजाबी यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़ का मानना है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में उन्हें किसी भी तरह का रिस्क लेने की आवश्यकता नहीं है।
एससी वोटर स्थिति को परिवर्तित करेंगे
जालंधर लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पंजाब की चार संसदीय सीटों में से एक है। एससी मतदाता बहुल इस सीट पर रिंकू के लड़ने से समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे। सुशील रिंकू यहां से उपचुनाव जीत चुके हैं। यही कारण है कि पार्टी ने उन पर फिर भरोसा जताया है। इस संसदीय सीट के अंतर्गत कुल 9 विधानसभा की सीटें आती हैं। फिल्लौर, नकोदर, शाहकोट, करतारपुर, जालंधर पश्चिम, जालंधर सेंट्रल, जालंधर नॉर्थ, जालंधर कैंट और आदमपुर हलके हैं। इसमें 4 विधानसभा (फिल्लौर, करतारपुर, जालंधर वेस्ट, आदमपुर) की सीटें एससी समुदाय के लिए आरक्षित हैं। जालंधर लोकसभा सीट के पहले सांसद अमरनाथ थे। उनके बाद अगले 20 साल तक इस सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सरदार स्वर्ण सिंह चुने जाते रहे। स्वर्ण सिंह के जालंधर लोकसभा सीट से जीतने का जो सिलसिला 1957 में शुरू हुआ, वह 1977 तक जारी रहा।
लोग बॉर्डर बेल्ट के विकास को मूल्यांकित करेंगे
परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को अपने निर्वाचन क्षेत्र में कुल 57,323 वोट मिले थे। उन्हें 39.55 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। इस बार लोग उन्हें बॉर्डर बेल्ट के विकास के कामों पर मूल्यांकन करेंगे। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार आदेश प्रताप सिंह कैरों को 10,999 वोटों के अंतर से हराया। उन्होंने जिला तरनतारन के एसएस स्कूल घरियाला से 12वीं तक की शिक्षा हासिल की है। उनके पास खेती के लिए 60 एकड़ जमीन एवं पट्टी अनाज मंडी में आढ़त भी है। पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के बाद अकाली दल छोड़कर उन्होंने कांग्रेस को ज्वाइन किया। पट्टी नगर परिषद चुनाव में लालजीत सिंह भुल्लर ने आम आदमी पार्टी के पक्ष में अभियान चलाया और गिरफ्तारी भी दी। धालीवाल शिक्षा के दिनों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के समर्थक के रूप में उन्होंने आतंकवाद का विरोध किया।
माझा की सरदारी के लिए जंग
आम आदमी पार्टी की ओर से लोकसभा चुनाव में अमृतसर लोक सभा सीट के लिए पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल को प्रत्याशी बनाया गया है। धालीवाल पार्टी की ओर से बुलंद आवाज हैं। इस सीट पर पार्टी की माझा के लिए सरदारी के लिए जंग देखने को मिलेगी। पार्टी ने उन्हें तीसरी बार विश्वास प्रकट करके चुनाव मैदान में उतारा है।
गठबंधन को विरोध करने की तैयारी
फरीदकोट सीट से घोषित आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कर्मजीत अनमोल मुख्यमंत्री भगवंत मान का करीबी हैं, यह सीट अकाली दल का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन साल 2014 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अकाली दल के गढ़ को भेद दिया था। प्रो.साधू सिंह ने दो लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की थी। अभी भाजपा-शिअद गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं हुई है, लेकिन आप ने पहले ही गठबंधन को रोकने की तैयारी कर ली है। यह सीट चार जिलों फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर व बठिंडा में फैली हुई है जिसमें फरीदकोट व मोगा के क्रमवार सभी 3 व 4 विधानसभा क्षेत्र जबकि मुक्तसर के गिद्दड़बाहा व बठिंडा के रामपुरा फुल विधानसभा क्षेत्र शामिल है। यहां से अकाली दल की टिकट के लिए हरप्रीत सिंह कोटभाई, पूर्व सांसद परमजीत कौर गुलशन, पूर्व मंत्री गुलजार सिंह रणीके ने दावेदारी जताई हुई है। कांग्रेस की टिकट के लिए वर्तमान सांसद मोहम्मद सदीक के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, पूर्व विधायक डॉ.राज कुमार वेरका आदि दावेदार हैं।
पांच साल के बाद फिर चुनाव मैदान में
फतेहगढ़ साहिब से विधानसभा हलका बस्सी पठाना से कांग्रेस के पूर्व विधायक गुरप्रीत सिंह जीपी को टिकट दिया गया है। वे पांच साल बाद फिर चुनाव मैदान में हैं। इस सीट के तहत बस्सी पठाना, फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, खन्ना, समराला, पायल, साहनेवाल, रायकोट और अमरगढ़ विस हलके आते हैं। इनमें 15 लाख से अधिक वोटर हैं। इन हलकों में एससी वोट ज्यादा हैं।