September 2, 2026

होर्मुज संकट के बीच शी जिनपिंग का मिस्र दौरा, स्वेज कैनाल पर चीन की नजर क्यों?

मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों की रणनीतिक अहमियत अचानक बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है। 2 सितंबर को उपलब्ध शिपिंग डेटा के मुताबिक, एक दिन में सिर्फ चार कमोडिटी जहाजों ने होर्मुज पार किया, जबकि 10 दिनों का औसत करीब 13 जहाज प्रतिदिन था। यह वही समुद्री रास्ता है जिससे सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है।

इसी तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब एक दशक बाद मिस्र पहुंचे हैं। काहिरा में उनकी मुलाकात राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से हुई।

होर्मुज

होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे ऊर्जा उत्पादक देशों के लिए यह दुनिया के बाजारों तक पहुंच का प्रमुख समुद्री रास्ता है।

इस रास्ते में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर तेल, गैस, शिपिंग और बीमा लागत पर पड़ता है।

अब स्वेज कैनाल की बढ़ी अहमियत

होर्मुज में परेशानी बढ़ने के साथ व्यापारियों और शिपिंग कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ रही है। ऐसे में मिस्र का स्वेज कैनाल रणनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण हो गया है।

स्वेज कैनाल एशिया और यूरोप के बीच सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। होर्मुज संकट के दौरान स्वेज से तेल टैंकरों की आवाजाही में भी बढ़ोतरी देखी गई है। जून में रिपोर्टों के मुताबिक, होर्मुज व्यवधान के बीच स्वेज कैनाल में तेल प्रवाह और राजस्व में सुधार हुआ था।

हालांकि स्वेज कैनाल होर्मुज का सीधा विकल्प नहीं है। दोनों अलग-अलग समुद्री मार्ग हैं और हर प्रकार के तेल या माल को होर्मुज से हटाकर स्वेज के रास्ते नहीं भेजा जा सकता।

चीन के लिए मिस्र इतना जरूरी क्यों?

चीन दुनिया का बड़ा ऊर्जा आयातक है और मध्य पूर्व उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान चीन की ऊर्जा सुरक्षा और यूरोप के साथ उसके व्यापार दोनों को प्रभावित कर सकता है।

यही वजह है कि बीजिंग मिस्र के साथ अपने संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहता। चीन ने मिस्र में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार भी तेजी से बढ़ा है।

होर्मुज अमेरिका के लिए बढ़ती चुनौती

चीन का मिस्र के साथ बढ़ता सहयोग अमेरिका के लिए भी रणनीतिक संदेश रखता है। मिस्र लंबे समय से अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार रहा है और उसे हर साल बड़ी अमेरिकी सैन्य सहायता मिलती है।

इसका मतलब यह नहीं है कि मिस्र अमेरिका से दूर हो गया है। बल्कि काहिरा कई शक्तियों के साथ संबंध बनाकर अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

चीन बना रहा है नया पावर नेटवर्क

शी जिनपिंग का मिस्र दौरा केवल एक द्विपक्षीय यात्रा के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह चीन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह मध्य पूर्व में खुद को आर्थिक साझेदार और कूटनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है।

चीन पहले ही ईरान और सऊदी अरब के बीच कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा चुका है।

बदल रहा है मिडिल ईस्ट का पावर मैप

होर्मुज संकट ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक भू-राजनीति में समुद्री रास्ते सिर्फ व्यापार के साधन नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति के केंद्र भी हैं। एक तरफ अमेरिका सैन्य ताकत के जरिए क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है, तो दूसरी तरफ चीन आर्थिक निवेश, व्यापार और कूटनीति के जरिए अपनी जगह मजबूत कर रहा है।

मिस्र का स्वेज कैनाल इस बदलते समीकरण में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में अगर होर्मुज की अस्थिरता जारी रहती है, तो स्वेज, लाल सागर और भूमध्यसागर से जुड़े व्यापारिक गलियारों की अहमियत और बढ़ सकती है।

Exit mobile version