August 16, 2026
बंधेज पगड़ी

PM मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिखा खास अंदाज

बंधेज पगड़ी  : 15 अगस्त 2026 को देश ने अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित किया। हर साल की तरह इस बार भी उनके पहनावे ने लोगों का ध्यान खींचा। पीएम मोदी लाल और पीले रंग की खास बंधेज पगड़ी में नजर आए। लाल रंग की पगड़ी पर पीले और सफेद रंग का बांधनी पैटर्न दिखाई दे रहा था। इसके साथ उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट पहनी थी।

बंधेज पगड़ी में दिखा खास अंदाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे में पगड़ी एक खास पहचान बन चुकी है। 2014 में पहली बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान भी उन्होंने अलग अंदाज की पगड़ी पहनी थी। इसके बाद हर साल उनकी पगड़ी का रंग, डिजाइन और शैली बदलती रही है।

इस बार चुनी गई लाल बंधेज पगड़ी ने राजस्थान और पश्चिमी भारत की पारंपरिक टेक्सटाइल कला की याद दिलाई। बंधेज या बांधनी भारत की पारंपरिक टाई-डाई तकनीक है, जिसमें कपड़े को छोटे-छोटे हिस्सों में बांधकर रंग दिया जाता है। इससे कपड़े पर खास तरह के बिंदु और पैटर्न बनते हैं।

2014 से लगातार बदलता रहा पगड़ी का अंदाज

पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस के लुक को देखें तो पिछले वर्षों में उनकी पगड़ियों में कई तरह के रंग और डिजाइन देखने को मिले हैं। लाल, पीला, गुलाबी, केसरिया, बांधनी और लहरिया जैसे पारंपरिक रंगों और शैलियों का इस्तेमाल किया गया है। कुछ मौकों पर उनकी पगड़ी में तिरंगे के रंगों की झलक भी देखने को मिली।

इनमें से कई डिजाइन राजस्थान और पश्चिमी भारत की पारंपरिक कपड़ा संस्कृति से प्रेरित माने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय मंच पर किसी नेता का पहनावा भी सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक संदेश देने का माध्यम बन सकता है।

धार्मिक पहचान से अलग पारंपरिक शैली

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी की पगड़ियों की एक खास बात यह भी रही है कि वे आमतौर पर ऐसी शैली चुनते हैं जिसकी कोई स्पष्ट धार्मिक पहचान न हो। विश्लेषण के मुताबिक, उनकी लाल किले वाली पगड़ियां राजस्थान और गुजरात से जुड़ी पारंपरिक, औपचारिक और शाही साफा शैली के ज्यादा करीब दिखाई देती हैं।

इसका उद्देश्य देश की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं और भारतीय संस्कृति की विविधता को सामने लाना भी माना जाता है। यही वजह है कि हर साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की पगड़ी चर्चा का विषय बन जाती है।

लाल किले से ‘सप्त धारा’ का संदेश

इस बार प्रधानमंत्री मोदी का संदेश सिर्फ पहनावे तक सीमित नहीं रहा। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने भारत के भविष्य को लेकर ‘सप्त धारा’ यानी सात धाराओं की बात की। इसमें आर्थिक विकास, तकनीक, सामाजिक प्रगति, पर्यावरण, युवाओं की भूमिका, संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर भी जोर दिया। उन्होंने युवाओं को देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भागीदार बताते हुए आने वाले वर्षों के लिए बड़े संकल्प लेने का आह्वान किया।

पहली बार लाल किले पर गूंजा ‘वंदे मातरम्’

इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह की एक और बड़ी खासियत रही। 150 वर्ष पूरे कर रहे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को पहली बार लाल किले की प्राचीर से समारोह का हिस्सा बनाया गया। इससे कार्यक्रम में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया।

प्रधानमंत्री मोदी का इस साल का लाल किले वाला लुक इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें पारंपरिक भारतीय शिल्प और आधुनिक राष्ट्रीय संदेश का मेल दिखाई दिया। लाल-पीली बंधेज पगड़ी ने जहां भारतीय संस्कृति और क्षेत्रीय विरासत की झलक दिखाई, वहीं उनके भाषण ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सामने रखा।

इस तरह 15 अगस्त 2026 को पीएम मोदी की पगड़ी केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं रही, बल्कि स्वतंत्रता दिवस की उनकी वर्षों पुरानी परंपरा का एक और रंगीन अध्याय बन गई।

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