नेपाल -तिब्बत की सीमा पर आई भीषण बाढ़ और मलबे ने भारी तबाही मचा दी है। हादसे के तीन दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है और मलबे से शव मिलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। 28 अगस्त की सुबह तक इस आपदा में मरने वालों की संख्या 469 तक पहुंच गई, जबकि 30 से ज्यादा देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। सबसे ज्यादा भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर है।

नेपाल-तिब्बत 1600 से ज्यादा लोगों को बचाया गया
नेपाल पुलिस और राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में अभियान चला रही हैं। अब तक करीब 1600 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिसमें 796 लोगों को हेलीकॉप्टर और इतने ही लोगों को जमीनी रास्ते से बाहर निकाला गया। हालांकि, कई इलाकों में सड़कें और पुल टूट जाने की वजह से बचाव टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
चितवन जिले में सबसे ज्यादा 137 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों में भी शव मिले हैं। बाढ़ ने करीब 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और लगभग 40 किलोमीटर सड़क को नुकसान पहुंचाया है। कई पनबिजली परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
30 से ज्यादा देशों के नागरिक लापता
इस त्रासदी ने सिर्फ नेपाल को ही नहीं, बल्कि कई देशों को चिंता में डाल दिया है। भारत, अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूक्रेन समेत 30 से ज्यादा देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार नेपाल में ही करीब 910 लोग लापता हैं। इनमें स्थानीय नागरिकों के साथ पर्यटक और सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। तिब्बत की तरफ चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक 558 लोग लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक बताए गए हैं।

288 भारतीयों से संपर्क नहीं
भारत के लिए भी यह हादसा बेहद चिंता का विषय है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक करीब 288 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है। इनमें 73 लोग एक पनबिजली परियोजना में काम कर रहे थे, जबकि कई अन्य लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना में काम करने वाले 63 मजदूर और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। भारत सरकार नेपाल के साथ लगातार संपर्क में है और राहत अभियान में मदद कर रही है।
अमेरिका, ब्रिटेन और श्रीलंका भी मदद को आगे आए
नेपाल में आई इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद कई देशों ने सहायता का ऐलान किया है। अमेरिका ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए 5 लाख डॉलर देने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड की सहायता और आपातकालीन राहत टीमें भेजने की बात कही है। हादसे में करीब 33 ब्रिटिश नागरिकों के लापता होने की जानकारी है। श्रीलंका ने भी 10 लाख डॉलर की आर्थिक मदद का ऐलान किया है।
भारत ने नेपाल के लिए अब तक 47.5 टन राहत सामग्री भेजी है, जिसमें दवाइयां और खाने के पैकेट शामिल हैं। भारत की ओर से बचाव और राहत गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नेपाल-तिब्बत कैसे आई इतनी बड़ी तबाही?
रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल-चीन सीमा के पास लांगतांग लिरुंग पर्वत के आसपास ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूट गया। इसके साथ पहाड़ की चट्टानें भी दरक गईं और भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा घाटी की ओर बहने लगा।
यह मलबा पहले ल्हेंदे नदी में पहुंचा, जिससे कुछ समय के लिए नदी का प्रवाह रुक गया। इसके बाद जब यह प्राकृतिक रुकावट टूटी तो पानी और मलबे का तेज बहाव भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली की ओर बढ़ा और रास्ते में आने वाले कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।
शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता के भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण एजेंसी की जांच के बाद संकेत मिला कि यह हलचल ग्लेशियर और पहाड़ से टूटकर गिरे मलबे के कारण हुई थी।

नई झील ने बढ़ाई चिंता
तबाही के बाद एक और खतरा सामने आया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में मलबा जमा होने से एक नई झील बन गई है। चीनी अधिकारियों के अनुसार इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और आने वाले दिनों में इसमें और पानी बढ़ने की आशंका थी।
अगर यह प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है तो नीचे के इलाकों में एक और बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से लोगों को नदी किनारे से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी अलर्ट
नेपाल में हुई इस तबाही को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और गंडक नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। बिहार के वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं।
उत्तराखंड में भी संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी बढ़ाई गई है। राहत एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि नेपाल से आने वाले पानी का असर भारतीय इलाकों पर पड़ने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। मलबे में दबे लोगों की तलाश के साथ-साथ शवों की पहचान का काम भी किया जा रहा है। ऐसे में आने वाले घंटों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।

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