मुद्दे : पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव बना वैश्विक चिंता का कारण
दुनिया के कई हिस्सों में इस समय राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी, पाकिस्तान और चीन की बढ़ती नजदीकियां तथा भारत की रणनीतिक सक्रियता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन घटनाओं का असर वैश्विक व्यापार, तेल बाजार और दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
मुद्दे : पाकिस्तान-चीन संबंध फिर चर्चा में
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के चीन दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, सुरक्षा समझौते और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर नई रणनीति पर चर्चा हो रही है। पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसे चीन से आर्थिक मदद की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन लगातार पाकिस्तान में अपने निवेश को मजबूत कर रहा है। इससे दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है क्योंकि CPEC का कुछ हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है, जिस पर भारत पहले से आपत्ति जताता रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ी बयानबाजी
दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। अगर यहां किसी प्रकार का संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ईरान ने हाल ही में कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए किसी भी कदम से पीछे नहीं हटेगा। वहीं अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के संकेत दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और गंभीर होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
मुद्दे : भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी
भारत के लिए यह स्थिति कई मायनों में महत्वपूर्ण है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है और पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की संभावना रहती है।
इसके अलावा भारत के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं। किसी भी बड़े संघर्ष की स्थिति में वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता बन सकती है। इसी कारण भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर
संयुक्त राष्ट्र समेत कई बड़े देशों ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस तनाव को कम किया जा सकता है। यूरोपीय देशों ने भी होर्मुज क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया है क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
मुद्दे : भारत की विदेश नीति की परीक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति भारत की विदेश नीति के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। भारत को अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखना होगा। साथ ही पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर भी रणनीतिक नजर बनाए रखनी होगी।
भारत पहले भी कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। आने वाले समय में भारत की कूटनीतिक भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में तेजी से बदलते राजनीतिक हालात पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुके हैं। पाकिस्तान-चीन की बढ़ती साझेदारी, ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितता आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकती है। भारत इस पूरे घटनाक्रम पर सतर्क नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है

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