145 Birth Anniversary: स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं सरोजिनी नायडू, जानें उनके जीवन के बारे में
सरोजिनी नायडू का बचपन उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में बीता। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में पूरी की और फिर कैलकटा विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। सरोजिनी नायडू का योगदान महिला सशक्तिकरण में अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में अपना समर्थन दिया और उन्हें उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए काम किया।

उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गांधीजी के साथ जुड़कर स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया और भारतीयों को आज़ादी की लड़ाई में जुटने के लिए प्रेरित किया।
सरोजिनी नायडू को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ‘निजी’ और ‘विचारशील’ नेता के रूप में स्मरण किया जाता है। उनके विचार और कार्यों ने भारतीय समाज में एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
ब्यूरो: 145 Birth Anniversary भारत में महिलाओं की सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए भारत में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। आज के दिन को भारत में स्वर कोकिला सरोजिनी नायडू का जन्मदिन मनाया जाता है। क्योंकि उनका जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था और वह स्वतंत्र भारत की पहली महिला थीं, जिन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बनाया गया था।
वह 1947 से 1949 तक उत्तर प्रदेश की राज्यपाल रहीं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष भी थीं। देश की महान कवयित्री, स्वतंत्रता सेनानी और गीतकार सरोजिनी नायडू ने भारत की आजादी के लिए विभिन्न आंदोलनों में भाग लेने के अलावा समाज में महिलाओं के अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी।
महिलाओं को समाज में फैली कुरीतियों के प्रति जागरूक किया गया और सामान्य महिलाओं को भी स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया, जिसके कारण उनके जन्मदिन 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
सरोजिनी नायडू के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें
145 Birth Anniversary नायडू पढ़ाई में बहुत होशियार थे और उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा में टॉप किया था।
वह कम उम्र में ही उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चली गईं। वहां उन्होंने किंग्स कॉलेज, लंदन और गिरटन कॉलेज से पढ़ाई की। उनकी शादी 19 साल की उम्र में डॉ. गोविंद राजालु नायडू से हुई थी। नायडू को बचपन से ही कविता में बहुत रुचि थी।

सरोजिनी नायडू ने 1915 से 1918 तक भारत के स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया। वह विशेष रूप से गोपाल कृष्ण गोखले, रवीन्द्र नाथ टैगोर, एनी बेसेंट, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी थीं।
1925 में, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में पूर्वी अफ्रीकी भारतीय कांग्रेस की अध्यक्षता की और ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें केसर-ए-हिंद पदक से सम्मानित किया गया। यह पदक उन्हें भारत में प्लेग महामारी के दौरान उनके काम के लिए प्रदान किया गया था
145 Birth Anniversary जलियाँवाला बाग की त्रासदी से क्षुब्ध होकर उन्होंने 1908 में मिला ‘केसर-ए-हिन्द’ पुरस्कार लौटा दिया।
गोल्डन थ्रेशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। उनके दूसरे और तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम और ब्रोकन विंग ने उन्हें एक लोकप्रिय कवि बना दिया।
2 मार्च 1949 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।

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