August 11, 2026
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US ने वेनेजुएला से जब्त 2 Oil Tankers कबाड़ में बेचे, भारत में होंगे डिमोलिश

US ने वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल कारोबार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए दो तेल टैंकरों को अब कबाड़ में बेच दिया है। खास बात यह है कि इन दोनों जहाजों को भारत लाकर स्क्रैप यार्ड में डिमोलिश किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इन टैंकरों को दुबई स्थित जहाज रीसाइक्लिंग कंपनी Global Marketing Systems (GMS) ने खरीदा है।

दोनों जहाजों की बिक्री पिछले महीने हुई थी और इनकी कीमत का खुलासा नहीं किया गया है। Reuters के अनुसार, बिक्री को अदालत के आदेश की मंजूरी प्राप्त थी।

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US कौन से दो तेल टैंकर बेचे गए?

US की ओर से स्क्रैप के लिए बेचे गए दो टैंकरों के नाम Era और Lileo हैं। Era पहले Marinera और Bella 1 नाम से संचालित हो चुका है, जबकि Lileo का पुराना नाम Galileo और Veronica रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों जहाजों के नाम समय-समय पर बदले गए थे। प्रतिबंधों से जुड़े जहाजों में नाम, झंडे या स्वामित्व बदलना असामान्य नहीं है, क्योंकि इससे उनकी पहचान और गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की जाती है।

भारत में क्यों होंगे डिमोलिश?

इन दोनों जहाजों को तेल परिवहन के लिए दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय स्क्रैप के तौर पर नष्ट किया जाएगा। इसके लिए इन्हें भारत के शिप-रिसाइक्लिंग यार्ड में भेजा जाएगा।

भारत दुनिया के प्रमुख जहाज रीसाइक्लिंग केंद्रों में शामिल है। पुराने और अनुपयोगी जहाजों को यहां काटकर उनके स्टील और अन्य उपयोगी हिस्सों को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया से जहाज का दोबारा समुद्री कारोबार में इस्तेमाल खत्म हो जाता है और उसकी धातु को रिसाइकिल किया जा सकता है।

 Era टैंकर पर अमेरिका का क्या आरोप था?

Era टैंकर को US  ने जनवरी में आइसलैंड के दक्षिण में कब्जे में लिया था। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सैन्य विशेष बलों ने कई सप्ताह तक उसका पीछा करने के बाद उसे अपने नियंत्रण में लिया था।

अमेरिका का कहना था कि यह जहाज वेनेजुएला और ईरान से जुड़े प्रतिबंधित तेल के परिवहन में इस्तेमाल किया गया था। इससे पहले यह जहाज कैरेबियन क्षेत्र में वेनेजुएला के तेल निर्यात को रोकने के लिए लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी से बच निकलने में सफल रहा था।

Lileo को भी किया गया था जब्त

दूसरा जहाज Lileo भी जनवरी में कैरेबियन सागर में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान जब्त किया गया था। यह जहाज रूस से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था।

इस तरह दोनों टैंकरों का मामला सिर्फ वेनेजुएला के तेल कारोबार तक सीमित नहीं था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन जहाजों का संबंध अलग-अलग प्रतिबंधित गतिविधियों और देशों से जुड़ा हुआ था।

GMS ने खरीदे जहाज

दुबई स्थित Global Marketing Systems ने दोनों जहाजों को स्क्रैप के लिए खरीदा है। कंपनी के CEO अनिल शर्मा ने Lloyd’s List को बताया कि अमेरिकी सरकार ने जहाजों को कंपनी को बेचा और बिक्री के लिए अदालत का आदेश मौजूद था।

हालांकि, जहाजों के पुराने स्वामित्व को लेकर कुछ जटिलताएं भी थीं। कंपनी के अनुसार, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि अतीत में इन जहाजों का वास्तविक मालिक कौन था।

US की बड़ी कार्रवाई का हिस्सा

ये दोनों जहाज अमेरिका की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा हैं। Reuters के मुताबिक, वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका ने करीब 10 तेल टैंकरों तक को जब्त किया था। इनमें से कई जहाज प्रतिबंधित गतिविधियों से जुड़े बताए गए थे।

तेल टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य प्रतिबंधित तेल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना बताया गया है। खासकर वेनेजुएला के तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू कराने के लिए समुद्री रास्तों पर निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई गई है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है?

इन टैंकरों का भारत में डिमोलिश होना देश के शिप-रिसाइक्लिंग उद्योग के लिए एक सामान्य व्यावसायिक गतिविधि के तौर पर देखा जा सकता है। यहां पुराने जहाजों को तोड़कर उनसे निकलने वाली धातु और अन्य सामग्रियों को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि, इन जहाजों की पृष्ठभूमि और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े होने के कारण यह मामला सामान्य जहाज स्क्रैपिंग से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर रहा है।