August 8, 2026
पाकिस्तान

पेट्रोल-डीजल पर उबल पड़ा पाकिस्तान, ‘IMF और तुम दोनों भाड़ में जाओ’… शहर-शहर प्रदर्शन

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए पेट्रोलियम लेवी को लेकर लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को देश के कई शहरों में हजारों लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व धार्मिक-राजनीतिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने किया। कराची और लाहौर समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और सरकार से पेट्रोलियम लेवी वापस लेने की मांग की।

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पाकिस्तान पेट्रोलियम लेवी को लेकर क्यों नाराज हैं लोग?

पाकिस्तान सरकार पेट्रोल, डीजल और केरोसिन पर पेट्रोलियम लेवी के रूप में टैक्स लगाती है। इस टैक्स का सीधा असर ईंधन की कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ता है। महंगाई और आर्थिक दबाव से पहले ही परेशान पाकिस्तान की जनता अब इस अतिरिक्त बोझ का विरोध कर रही है।

जमात-ए-इस्लामी का आरोप है कि सरकार आम जनता से टैक्स वसूलकर उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है। पार्टी का कहना है कि गरीब, छात्र और मध्यम वर्ग पहले ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, ऐसे में पेट्रोलियम लेवी उनके लिए एक और बड़ा बोझ है।

कराची से लाहौर तक सड़कों पर प्रदर्शन

पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ कराची में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सड़कों पर मार्च किया, जिसके कारण कई जगहों पर यातायात प्रभावित हुआ। व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका असर देखने को मिला।

लाहौर में भी हजारों लोग रैली में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की टैक्स नीति के खिलाफ नारे लगाए और लेवी खत्म करने की मांग की। इन प्रदर्शनों के जरिए जमात-ए-इस्लामी ने सरकार पर आर्थिक नीतियों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की है।

पाकिस्तान हाफिज नईम-उर-रहमान का सरकार पर हमला

लाहौर की रैली को संबोधित करते हुए जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पेट्रोलियम लेवी को तत्काल खत्म करने की मांग की।

अपने भाषण में उन्होंने IMF का भी जिक्र किया। सरकार की ओर से यह तर्क दिए जाने पर कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF इस तरह की राहत की अनुमति नहीं देगा, नईम-उर-रहमान ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि अगर IMF गरीबों पर बोझ डालने वाली नीतियों की वजह बन रहा है तो सरकार को उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। उनका आरोप था कि सरकार गरीबों और छात्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।

सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

जमात-ए-इस्लामी ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार पेट्रोलियम लेवी वापस नहीं लेती है तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। पार्टी प्रमुख ने देशभर में प्रदर्शन तेज करने का ऐलान किया है।

उन्होंने कराची से चित्राल तक प्रमुख हाईवे जाम करने की चेतावनी भी दी। पार्टी के मुताबिक इस दौरान केवल एंबुलेंस और जरूरी आपातकालीन वाहनों को गुजरने की अनुमति देने की बात कही गई है।

पाकिस्तान ‘IPP माफिया’ पर भी निशाना

पेट्रोलियम लेवी के अलावा प्रदर्शनकारी पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े ‘IPP माफिया’ के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी का आरोप है कि स्वतंत्र बिजली उत्पादकों यानी IPPs से जुड़ी व्यवस्था के कारण सरकारी खजाने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है।

पार्टी का दावा है कि इस व्यवस्था में सरकारी धन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ है। हालांकि इन आरोपों को लेकर सरकार की ओर से अलग-अलग मौकों पर अपना पक्ष रखा जाता रहा है।

आर्थिक संकट के बीच बढ़ता दबाव

पाकिस्तान पहले से ही महंगाई, कर्ज और आर्थिक दबाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में ईंधन से जुड़े टैक्स और कीमतें जनता के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दे बन जाते हैं।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों पर नहीं पड़ता, बल्कि परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ आंदोलन तेजी से राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे राजस्व जुटाने और आर्थिक सुधारों के लिए जरूरी कदम उठाने हैं, वहीं दूसरी ओर जनता और राजनीतिक दलों के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

अगर जमात-ए-इस्लामी अपने ऐलान के मुताबिक आंदोलन को देशभर में फैलाती है और हाईवे जाम जैसे कदम उठाती है, तो सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।

 पाकिस्तान में पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब सिर्फ टैक्स का मुद्दा नहीं रह गया है। यह महंगाई, आर्थिक नीतियों और सरकार की जवाबदेही को लेकर बढ़ते जनाक्रोश का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन कितना बड़ा रूप लेता है और शहबाज शरीफ सरकार इस पर क्या फैसला करती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।